
सुमित शर्मा
त्रिलोक के स्वामी भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय की शिव-भक्ति को पुत्र भाव, गुरु भाव और पूर्ण समर्पण का सबसे सुंदर उदाहरण माना जाता है। वर्तमान दौर में भगवान कार्तिकेय को केवल युद्ध के देवता के रूप में नहीं, बल्कि आत्मसंयम और धर्म के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा के रूप में भी देखा जा सकता है। भगवान कार्तिकेय की वीरता सिखाती है कि शक्ति का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि कमजोर और असहाय की रक्षा के लिए होना चाहिए। वर्तमान दौर में भी शिव-साधना पुत्र कार्तिकेय का यह भाव नजर आता है। यहां कार्तिकेय सिंह चौहान की तुलना भगवान कार्तिकेय से नहीं की जा रही है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में कार्तिकेय सिंह चौहान की ’शिव-साधना’ पुत्र भाव और गुरू भाव की प्रेरणा है। कार्तिकेय सिंह चौहान राजनीति में अपना गुरू अपने पिताजी शिवराज सिंह चौहान को मानते हैं। वे उन्हीं के पदचिन्हों
जेन-जी, जेन-अल्फा का दौर, उठने लगी युवा नेतृत्व की मांग-
जिस तरह से जेन-जी की ताकत पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर में दिखी। वह सभी के लिए सतर्क रहने के संकेत हैं। मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में जेन-अल्फा ने भी छोटी उम्र में बड़ा काम करके दिखाया। स्कूलों में जेन-अल्फा की आवाज एक क्रांति के रूप में सुनाई दी। युवाओं के इस दौर में युवा नेतृत्व की मांग भी तेजी से उठने लगी है। सीहोर जिले के सीहोर, बुधनी, आष्टा और इछावर विधानसभाओं में भी युवा नेतृत्व की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। सभी चाहते हैं कि अब उनका नेतृत्व किसी युवा के हाथों में हो, ताकि वह युवाओं की इच्छाओं को समझे, उनकी आवाज बने।