कोसमी मामला: कलेक्टर की जांच में बड़ा खुलासा, सागौन के 78 हजार पौधे काटकर बसाई गई थी अवैध बस्ती

सीहोर। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोसमी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सियासत गर्माई हुई है। इस बीच कलेक्टर की जांच रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में एक सनसनीखेज और नया मोड़ ला दिया है। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि वन भूमि पर कब्जा करने वाले लोग असल में भूमिहीन नहीं हैं, बल्कि वे दूसरे जिलों से आकर अवैध रूप से सरकारी जमीन पर कब्जा जमा रहे थे। इतना ही नहीं जमीन पर कब्जा करने के लिए हजारों की संख्या में कीमती सागौन के पौधों को भी काट दिया गया था।

जांच रिपोर्ट के अनुसार भैरूंदा तहसील के लाडक़ी परिक्षेत्र के कोसमी बीट स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट 426 में वन विकास निगम की 31.48 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यह जमीन साल 2020 में सामान्य वनमंडल से वन विकास निगम (सीहोर परियोजना मंडल) को ट्रांसफर की गई थी। निगम ने साल 2021 में इसके 135 हेक्टेयर रकबे में 3,37,500 सागौन के पौधे रोपे थे।
जांच में गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों और सैटेलाइट इमेज को मुख्य साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया है। इन तस्वीरों से यह साबित हुआ है कि साल 2021 तक यह पूरा कंपार्टमेंट पूरी तरह खाली वन भूमि था। साल 2022 से यहां सुनियोजित तरीके से कब्जे की शुरुआत हुई। सुनील पिता शैतान और अन्य लोगों ने मिलकर वृक्षारोपण को नष्ट किया और वहां अस्थायी झोपडिय़ां बनाकर खेती के नाम पर 31.48 हेक्टेयर वन क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया। इस दौरान लगभग 78.700 सागौन के पौधों को काट दिया गया।
खुद को भूमिहीन बताने वालों के पास पहले से हैं पक्के मकान
कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा यह किया गया है कि 11 अक्टूबर को अतिक्रमण हटाने के दौरान जिन 9 कब्जाधारियों को बेदखल किया गया, वे असल में भूमिहीन नहीं हैं। भैरूंदा के अनुविभागीय अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया है कि इन सभी 9 अतिक्रमणकारियों के मूल गांव सिंहपुर और हबीबनगर में पहले से ही पक्के मकान बने हुए हैं। उनके पास वैध मकान नंबर और वोटर आईडी कार्ड भी मौजूद हैं।
ड्रोन वीडियोग्राफी के बीच हुई कार्रवाई
प्रशासनिक अमले ने कार्रवाई के दौरान हटाई गई सभी 9 झोपडिय़ों को हटाने के साथ ही वहां बनाए गए अवैध कुएं को मिट्टी और मुरम से भर दिया। प्रशासन ने पूरी कार्रवाई की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसकी ड्रोन वीडियोग्राफी भी कराई है।
डिपो के बाहर धरना जारी
इस पूरी कार्रवाई के विरोध में स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कार्रवाई के खिलाफ वन विकास निगम के डिपो के बाहर पिछले 3 दिनों से धरना-प्रदर्शन चल रहा है और मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

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