नेशनल लोक अदालत: 4119 मामलों का हुआ निपटारा, टूटे हुए परिवार फिर से एक हुए

6.61 करोड़ रुपये की समझौता राशि हुई जमा, बुजुर्ग महिला को मिली बिजली बिल में राहत

सीहोर। जिला न्यायालय परिसर सहित जिले की सभी तहसील स्तरीय खंडपीठों में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। आपसी सुलह और भाईचारे के आधार पर विवादों को निपटाने के उद्देश्य से आयोजित इस लोक अदालत में कुल 4119 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसके माध्यम से 6,61,41,847 रुपये की समझौता राशि जमा हुई।
लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार अग्रवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत पक्षकारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी पक्ष की हार नहीं होतीए बल्कि दोनों पक्षों की जीत होती है और आपसी कड़वाहट समाप्त हो जाती है।
लोक अदालत में मिली सफलता
लंबित प्रकरण: कुल 1866 मामलों में राजीनामा हुआ, जिसमें 3.64 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई।
प्रिलिटिगेशन मामले: 2253 प्रकरणों का निपटारा कर 2.96 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूल की गई।
जब एक हुए परिवार
लोक अदालत केवल रुपयों के लेन-देन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने कई उजड़ते परिवारों को भी बचाया। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश वैभव मंडलोई की समझाइश के बाद पिंकी सेन और उनके पति मोहन सेन के बीच का विवाद सुलझ गया और वे खुशी-खुशी साथ रहने को तैयार हुए। इसी तरह समन जहां और उनके पति सोहैब ने भी आपसी मनमुटाव भुलाकर फिर से साथ घर जाने का निर्णय लिया।
बुजुर्ग महिला को मिली राहत
70 वर्षीय बुजुर्ग सलमा अंसारी के लिए यह लोक अदालत बड़ी राहत लेकर आई। उनकी कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए सचिव स्वप्नश्री सिंह ने बिजली विभाग से समन्वय कर न केवल उनके बकाया बिल में छूट दिलाई, बल्कि शेष राशि को किश्तों में जमा करने की सुविधा भी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान जनगणना कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रगणकों डॉली कुशवाह और राजेश्वर तिवारी को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिले के समस्त न्यायाधीशए पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना, अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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