अब नल-जल योजना के पानी से जानवर नहलाने, सड़क और गाड़ी धोने पर लगेगा तगड़ा जुर्माना

- गांवों में जल प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा, पानी समितियां संभालेंगी नल-जल योजनाओं की जिम्मेदारी

सीहोर। ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन, रखरखाव एवं पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर पानी समितियों का गठन किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत पानी समितियां जल योजनाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पानी समितियां ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी गांवों में नल-जल योजना के संचालन, संधारण, जल वितरण व्यवस्था और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगी। समिति पाइप लाइन, पंप, टंकी, वाल्व, मीटर सहित जल आपूर्ति से जुड़े सभी संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। समिति का उद्देश्य ग्रामीणों में जल योजनाओं के प्रति सामूहिक स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना होगा। जल आपूर्ति योजना का प्रचार-प्रसार, ग्रामीणों को जागरूक करना और पेयजल के उचित उपयोग के लिए प्रेरित करना भी समिति की जिम्मेदारी होगी।
पानी के दुरुपयोग पर लगेगा जुर्माना-
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पानी समितियों को जल अपव्यय रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई उपभोक्ता पेयजल का दुरुपयोग करते हुए पाया जाता है, जैसे नल के पानी से वाहन धोना, मवेशियों को नहलाना, कृषि कार्यों में पेयजल का उपयोग करना या नल कनेक्शन से सीधे मोटर पंप लगाकर पानी खींचना, तो समिति कार्रवाई की अनुशंसा कर सकेगी। ऐसे मामलों में पहली बार जल अपव्यय करने पर न्यूनतम 100 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं एक माह में दो बार से अधिक जल अपव्यय पाए जाने पर न्यूनतम 500 रुपए का जुर्माना और पेयजल आपूर्ति बंद करने की अनुशंसा ग्राम पंचायत को की जा सकेगी। यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन माह तक जल प्रभार का भुगतान नहीं करता है, तो पानी समिति पेयजल आपूर्ति स्थगित करने की अनुशंसा ग्राम पंचायत को कर सकेगी। समय पर जल शुल्क जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं पर बकाया राशि के 5 से 10 प्रतिशत तक शास्ति लगाने का प्रस्ताव भी समिति दे सकेगी।
स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण पेयजल की होगी निगरानी-
पानी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि ग्रामीणों को मिलने वाला पेयजल भौतिक, रासायनिक एवं जीवाणु प्रदूषण से मुक्त हो और निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध कराया जाए। समिति नियमित अंतराल पर जल गुणवत्ता परीक्षण कराएगी तथा जल की मात्रा और गुणवत्ता से संबंधित जानकारी जल पोर्टल पर दर्ज करेगी। जल वितरण में समानता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समिति गांवों के सभी मोहल्लों, बसाहटों और टोलों में उचित जल आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने में सहयोग करेगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों तथा कमजोर वर्गों को पेयजल उपलब्धता में प्राथमिकता दी जाएगी। पानी समितियां जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए ग्राम पंचायत, मध्य प्रदेश जल निगम, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करेंगी। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और नल-जल योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनभागीदारी आधारित बन सकेगा।

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