कलेक्टर की समीक्षा बैठक में पीएचई विभाग का दावा, 1024 गांवों के लिए स्वीकृत हैं पेयजल योजनाएं, 321 एकल योजनाओं का काम पूरा

सीहोर। कलेक्टर बालागुरू के. की अध्यक्षता में आयोजित जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जल निगम ने जिले में पेयजल आपूर्ति को लेकर बड़े दावे पेश किए हैं। समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिले के कुल 1024 गांवों में पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। अधिकारियों के इन दावों और कार्य प्रगति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कड़े निर्देश दिए कि जिले के किसी भी नागरिक को पीने के पानी की समस्या नहीं होनी चाहिए और हर घर तक पर्याप्त पेयजल पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में पीएचई विभाग और जल निगम द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जिले के 1024 गांवों के लिए पेयजल योजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें से 685 गांव समूह नल जल योजना और 332 गांव एकल नल जल योजना के अंतर्गत शामिल हैं। एकल योजनाओं में से 321 योजनाओं का कार्य पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। विभाग ने दावा किया कि पूर्ण हो चुकी 274 एकल योजनाओं को हैंडओवर भी किया जा चुका है, जबकि 200 समूह गांवों में पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है। बाकी बची योजनाओं का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है।
आष्टा-रानीपुरा योजना 76 प्रतिशत पूरी
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 719 गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने वाली महत्वाकांक्षी आष्टा-रानीपुरा समूह जल प्रदाय योजना की भौतिक प्रगति 76 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इस योजना के तहत पानी बांटने वाली पाइपलाइन, ऊंची पानी की टंकियां और अन्य जरूरी निर्माण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।
पानी की बर्बादी रोकें
कलेक्टर बालागुरू के. ने पानी की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि पानी की एक-एक बूंद कीमती है, इसलिए इसे व्यर्थ न बहने दिया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में नए ट्यूबवेल की जरूरत है, वहां बुजुर्गों और महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पास के स्थानों का चयन करें, ताकि उन्हें पानी के लिए दूर न जाना पड़े। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों जैसे सडक़ निर्माण आदि के दौरान यदि कोई पाइपलाइन टूटती है तो उसे तुरंत सुधारा जाए।
कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क सक्रिय
विभाग ने बैठक में यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुचारू जलापूर्ति के लिए कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क लगातार काम कर रहे हैं। फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से गांवों में पानी की शुद्धता की जांच नियमित रूप से हो रही है। पानी की टंकियों की सफाई और वाल्व चलाने वाले कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में साफ और सुरक्षित पानी की सप्लाई हो सके।



