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पितृमोक्ष अमावस्या: सीहोर के नर्मदा तटों पर उमड़ी आस्था, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, लगा भूतों का मेला

सीहोर की पार्वती नदी में मामा-भांजे डूबे, आंवलीघाट में जिला-पुलिस प्रशासन का प्रबंधन का आया काम, शांतिपूर्ण तरीके से लोगों ने किया स्नान

सीहोर। पितृमोक्ष अमावस्या यानी भूतड़ी अमावस्या पर सीहोर जिले के आंवलीघाट, नीलकंठ, नेहलई, बाबरी, छिपानेर, बुधनी सहित कई अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं ने नर्मदा घाटों पर पहुंचकर स्नान किया। जिले के प्रसिद्ध आंवलीघाट नर्मदा तट पर सबसे ज्यादा श्रद्धालु-भक्त पहुंचे। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यहां पर व्यवस्थाएं जुटाई गईं थी। इस दौरान जिला एवं पुलिस प्रशासन के बेहतर प्रबंधन से शांतिपूर्ण तरीके से लोग स्नान करते रहे। नर्मदा नदी के अंदर भी बैरीकेटिंग की गई थी, ताकि लोग गहरे पानी में न जा सके। नदी के अंदर नाव से भी सुरक्षा व्यवस्था की जा रही थी। इस दौरान यहां पर भूतों का मेला भी लगा।

रात 12 बजे से शुरू हो जाता है भूतों का मेला-

पितृमोक्ष (भूतड़ी) अमावस्या की मध्य रात्रि सीहोर जिले के प्रसिद्ध नर्मदा तट आंवलीघाट पर भूतों का मेला लगता है। श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन से यहां पर लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। दूर-दूर से लोग नर्मदा तट आंवलीघाट आते हैं। दरअसल आंवलीघाट का पौराणिक महत्व भी बताया गया है। इसके लिए यह नर्मदा तट बेहद खास माना जाता है। यहां पर अमावस्या की मध्य रात्रि 12 बजे से भूतों का मेला लगना शुरू हो जाता है। इस दौरान रातभर यह क्रम चलता है। जिन लोगों को बाहरी बाधाएं होती हैं उनको यहां पर नर्मदा स्नान भी कराया जाता है। ढोल-बाजों के साथ में देवों को बुलाया जाता है एवं नर्मदा स्नान कराकर उन्हें नए वस्त्र धारण कराए जाते हैं। देवों के हथियारों को भी नर्मदा स्नान कराया जाता है। यह क्रम वर्षों से चल रहा है। नर्मदा स्नान का सिलसिला भी रात 12 बजे से शुरू हो जाता है, जो अमावस्या को दिनभर चलता है। यहां से लोग स्नान करके मां बिजासन धान सलकनपुर पहुंचते हैं एवं मातारानी के दर्शन करके अपने जीवन को धन्य बनाते हैं।

सीसीटीव्ही कैमरों के साथ ही पुलिस बल किया तैनात –

आंवलीघाट नर्मदा स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला एवं पुलिस प्रशासन सहित ग्राम पंचायत ने भी व्यवस्थाएं जुटाई। जगह-जगह सीसीटीव्ही कैमरे लगाए गए थे। इसी के साथ जगह-जगह पुलिस बल की तैनात भी की गई थी। नर्मदा नदी के अंदर नाव पर गोताखोर, एनडीआरएफ की टीम सहित पुलिस के जवान भी सुरक्षा में तैनात रहे। लोग गहरे पानी में ना जाएं, इसके लिए नदी के अंदर भी बैरीकेटिंग की गई थी। खतरों के स्थानों पर सूचना बोर्ड भी लगाए गए थे।

पार्किंग के लिए करनी पड़ी मशक्कत –
अमावस्या को लेकर इस बार पार्किंग बनाने में भी प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी। खेतों में फसल एवं लगातार बारिश के कारण खुले स्थानों पर कीचड़ था। इसके कारण इन स्थानों पर मुरम, बजरी डलवाई गई। तीन स्थानों पर अलग-अलग पार्किंग बनाई गई थी। चार पहिया एवं दो पहिया वाहनों के लिए अलग-अलग स्थान तय किए गए थे। चार पहिया वाहनों को पुल के उपर मरदानपुर रोड पर एवं वहां पड़ी खाली जगह पर पार्किंग कराया गया। इधर गांजीत जाने वाले मार्ग पर भी पार्किंग कराई गई। दो पहिया वाहनों के लिए आंवलीघाट के गेट के पास एवं पर्यटन विकास भवन के आसपास भी दो पहिया वाहनों को पार्क कराया गया। मछुवारा भवन के पास भी वाहनों के लिए पार्किंग बनवाई गई। खेतों में फसलें लगने एवं लगातार बारिश के कारण खाली पड़ी जगहों पर पानी भराव एवं कीचड़ के कारण वहां पर बड़ी मात्रा में बजरी, मुरम भी डलवानी पड़ी।

कलेक्टर-एसपी सहित अन्य अधिकारी ने देखी व्यवस्थाएं –

भूतड़ी अमावस्या पर स्नान एवं पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा स्थित आंवलीघाट पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। कलेक्टर प्रवीण सिंह एवं एसपी मयंक अवस्थी ने आंवलीघाट पर की गई व्यवस्थाओं का रात्रि में जायजा लिया। उन्होंने घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान और पूजा कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संचालन के निर्देश दिए। घाट पर लोगों के सुगमता से आवागमन के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं की गई हैं। घाट पर आने वाले वाहनों के लिए पर्याप्त स्थान में पार्किंग, यातायात नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, प्रकाश की व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, अस्थायी शौचालय, अस्थाई चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। निरीक्षण के दौरान बुधनी एसडीएम राधेश्याम बघेल, एएसपी गीतेश गर्ग, तहसीलदार रेहटी भूपेंद्र कैलासिया, सीईओ जपं बुधनी देवेश सराठे, एसडीओपी बुधनी शशांक गुर्जर, एसडीओपी आष्टा आकाश अमलकर, एसडीओपी भैरूंदा दीपक कपूर, थाना प्रभारी रेहटी राजेश कहारे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान राजस्व विभाग का अमला एवं पंचायत सचिव प्रकाश दाहिमा भी ड्यूटी पर तैनात रहे।

ये है आंवलीघाट का आध्यात्मि महत्व –
आंवलीघाट का आध्यात्मिक दृष्टि से खासा धार्मिक महत्व है। यहां पर हत्याहरणी हथेड़ नदी एवं नर्मदा का संगम स्थल हैं। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास काल के दौरान कुछ समय यहां बिताया था। एक किवदंती यह भी प्रचलित है कि महाभारत युग में भीम द्वारा मां नर्मदा से विवाह करने के लिए नर्मदा नदी का जल प्रवाह रोकने के लिए जो चट्टाने यहां नर्मदा में डाली थीं, वह आज भी वहीं जमीं हैं। एक अन्य किवदंती के अनुसार लक्ष्मीजी रथ पर सवार होकर यहां कुंती से मिलने आई थी। उस रथ के पहियों के निशान आज भी पत्थरों पर दिखाई देते हैं। आंवली घाट पर लक्ष्मी कुंड, ब्रह्म पाश, भावनाथ बाबा की टेकरी, छोटे दादा धूनीवाले का स्थान नर्मदा मंदिर, हनुमान मंदिर, राम जानकी मंदिर दोनों ओर प्राचीन काल का नर्मदा मंदिर एवं राम जानकी मंदिर सहित अन्य मंदिर स्थित हैं।
कालियादेव मेला भी है प्रसिद्ध –
कालियादेव मेला जनजातीय संस्कृति और परंपरा की अनुपम छटा बिखेरता है। आज भी जनजातीय वर्ग के लोग अपनी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत संजोए हुए हैं। वे आदिम संस्कृति को छोड़े बिना वर्तमान के साथ संतुलन स्थापित कर अपने जीवन में वास्तविक आनंद पलों को खोज लेते हैं। इछावर तहसील के ग्राम नादान के पास सागौन के घने जंगलों में कालिया देव नामक स्थान है। यहां से निकली सीप नदी पर कालिया देव का झरना है। यहॉं हर वर्ष पितृ मोक्ष अमावस्या पर रात्रि में मेला लगता है। झरने के पास ही एक छोटा मंदिर है। कालिया देव मंदिर के नीचे एक गहरा कुंड हैं जिसमें सीप नदी का पानी गिरता है। इस गहरे कुंड को यहां के जनजातीय बंधु पाताल लोक का रास्ता भी कहते हैं। यहॉ कई ऐसे स्थल हैं जो प्राकृतिक सौंन्दर्य से भरे हैं। भूतड़ी अमावस्या पर इस क्षेत्र के जनजातीय समुदाय के महिला, पुरूष, बच्चे बड़ी संख्या में शाम को पहुंचने लगते हैं। सीप नदी में कालियादेव की पूजा अर्चना करते हैं। यहॉं रात्रि में विशाल मेला लगता है। इस मेले में एक लाख से अधिक लोग आते हैं।

सीहोर की पार्वती नदी में हादसा, मामा-भांजे डूबे-
इधर पितृमोक्ष अमावस्या पर सीहोर की पार्वती और अजनाल नदी के संगम पर बुधवार सुबह 5 लोग डूबने लगे। इनमें से तीन को बचा लिया गया। एक का शव 6 घंटे के बाद मिला, जबकि दूसरे की तलाश जारी थी। खबर लिखे जाने तक दूसरी शव नहीं मिल सका। दोनों आपस में मामा-भांजे हैं। सीहोर में हादसा ग्राम पंचायत अमलाहा के पास देहरी घाट पर बुधवार सुबह करीब 8 बजे हुआ। पांचों युवक पितृमोक्ष अमावस्या पर स्नान के लिए नदी में उतरे थे। इसी दौरान गहराई में चले गए। ये सभी आपस में रिश्तेदार हैं। कालापीपल के रहने वाले कृपाल मेवाड़ा (30) का शव दोपहर 2 बजे तक मिल गया। उसका भांजा बीरबल मेवाड़ा (19) लापता था। बचाए गए तीन लोगों को कालापीपल के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। पार्वती नदी का देहरी घाट दो जिलों की सीमा पर स्थित है। नदी के एक तरफ शाजापुर जिला और दूसरी तरफ सीहोर जिला लगता है। पितृमोक्ष अमावस्या को लेकर देहरी घाट पर काफी भीड़ थी। करीब 50 गांवों के लोग यहां स्नान करने पहुंचे थे। अमलाहा पुलिस चौकी, मंडी थाना, आष्टा थाना सहित कालापीपल थाने की पुलिस भी मौके पर उपस्थित रही। देहरी घाट पर हर अमावस्या पर बड़ी संख्या में ग्रामीण स्नान करने आते हैं। पितृ मोक्ष अमावस्या पर यहां मेला लगता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जो पूर्वजों की अस्थियों को उज्जैन या इलाहाबाद लेकर नहीं जा पाते, वे पार्वती और अजनाल नदी के संगम में अस्थियां विसर्जित कर देते हैं।

 

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