
सीहोर। बढ़ती उम्र में अपनों की बेरुखी और जमीन-मकान से जुड़े विवादों से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए सीहोर पुलिस की सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत एक बड़ा सहारा बनकर सामने आई है। पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना के निर्देश पर गठित इस पंचायत में बुजुर्गों की शिकायतों का ऐसा अनूठा समाधान निकला कि कई महीनों से परेशान चल रहे सीनियर सिटीजंस को बड़ी राहत मिल गई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के नेतृत्व में कोर कमेटी के सदस्य अनिल पालीवाल, साधु राम शर्मा और कमल सिंह ठाकुर की मौजूदगी में आयोजित इस पंचायत में कई रोचक और गंभीर मामलों पर सुनवाई हुईए जहां आपसी सहमति से कई परिवारों के बीच सालों पुराने विवाद चुटकियों में सुलझ गए।
किरायेदार नहीं दे रहा था 2020 से किराया
शहर के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग दंपत्ति ने पंचायत में गुहार लगाई थी कि उनके मकान में लंबे समय से एक किरायेदार रह रहा है, लेकिन उसने साल 2020 से न तो एक रुपया किराया दिया है और न ही बिजली का बिल चुकाया है। बिल ओवरड्यू होने के बावजूद किरायेदार मकान खाली करने को तैयार नहीं था।
पंचायत में सुनवाई के दौरान अनावेदक ने खुद का मकान बन जाने की बात कही और जल्द मकान खाली करने का भरोसा दिया। पंचायत के हस्तक्षेप से दोनों पक्षों की सहमति बनी कि किरायेदार आगामी 3 महीने के भीतर मकान पूरी तरह खाली कर देगा, बिजली के सारे बकाए बिल क्लियर करेगा और तयशुदा किराए की राशि भी चुकाएगा। यह पूरी प्रक्रिया 27 जनवरी तक पूरी कर पंचायत को रिपोर्ट दी जाएगी।
रातों-रात दुकान पर जड़ दिया ताला
एक अन्य मामले में शहरी क्षेत्र के एक बुजुर्ग ने शिकायत की कि पारिवारिक विवाद के चलते उनके ही परिजनों ने उस दुकान पर अचानक रात के वक्त ताला जड़ दिया, जिस पर वे परिवार के साथ बैठकर काम करते थे। इसके बाद मारपीट और पुलिस में झूठी शिकायतें दर्ज कराने का सिलसिला शुरू हो गया था। पंचायत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों की बात सुनी और पुलिस कार्रवाई की समीक्षा कर वैधानिक निर्देश जारी किए।
बच्चों को कंधे पर लादकर ले जाने को थे मजबूर
ग्रामीण क्षेत्र के एक बुजुर्ग ने दर्द बयां किया कि वे खेत पर परिवार के साथ मकान बनाकर रहते हैं, लेकिन पड़ोसी ने उनका रास्ता बंद कर दिया है। हालात ये थे कि छोटे-छोटे बच्चों को कीचड़ और पानी से बचाने के लिए कंधे पर लादकर मुख्य मार्ग तक छोडऩा पड़ता था।
अनावेदक पक्ष का तर्क था कि वह अपनी निजी जमीन से रास्ता नहीं देना चाहता। इस पर बुजुर्ग ने खुलासा किया कि वहां एक सरकारी रास्ता भी है, जिस पर अनावेदक ने खेती कर कब्जा कर रखा है। पंचायत ने राजस्व अधिकारियों के स्पष्टीकरण के आधार पर समझाइश दी कि सरकारी रास्ते पर कोई आपत्ति नहीं ली जाएगी। साथ ही बुजुर्ग को अनुमति दी गई कि वे अपनी क्षमतानुसार उस शासकीय रास्ते पर मुरम डलवाकर आवागमन सुगम बना सकते हैं। दोनों पक्षों की सहमति से इस अनूठे विवाद का सुखद अंत हुआ।
बुजुर्ग महिला को मिली बकाए किराए की दूसरी किस्त
एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने शिकायत की थी कि दुकान खाली होने के बाद भी अनावेदक उन्हें बकाया किराया नहीं दे रहा है। पिछली बैठकों में पंचायत द्वारा समयसीमा तय की गई थी। इस बार सुनवाई के दौरान आवेदक पक्ष ने पंचायत के सामने ही दूसरी किस्त के रूप में 15 हजार रुपये नकद बुजुर्ग महिला को सौंपे और बाकी की शेष राशि अगले महीने देने का वादा किया।
इस तरह सीहोर पुलिस की यह अनूठी सीनियर सिटीजन पंचायत बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान लाने का बड़ा जरिया बन गई है, जहां बिना लंबी अदालती प्रक्रियाओं के आपसी सूझबूझ और काउंसलिंग से मामलों का मौके पर ही निपटारा हो रहा है।