Newsआष्टाइछावरजावरनसरुल्लागंजबुदनीमध्य प्रदेशरेहटीसीहोर

जिला जेल में कैदी की मौत, परिजन का आरोप बीमार होने के बाद भी नहीं दिया इलाज

सीहोर। बुधवार की सुबह से जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल सुर्खियों में आ गई है। दरअसल, जेल में बंद एक कैदी की मौत हो गई है। मौत की खबर मिलते ही जब रोते-बिलखते घरवाले जेल पहुंचे तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों का आरोप है कि श्रीराम जेल के अंदर कई दिनों से बीमार था, वह इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन जेल के डॉक्टरों और साहबों ने एक नहीं सुनी। घरवालों का कहना है कि अगर वक्त रहते श्रीराम को किसी अच्छे अस्पताल भेज दिया जाता तो आज वह जिंदा होता। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी जेल के बड़े अफसरों ने चुप्पी साध ली है वे न तो मीडिया के सामने आ रहे हैं और न ही कोई जवाब दे रहे हैं।
मृतक श्रीराम वर्मा के परिजनों का कहना है कि जेल में बंद रहने के दौरान श्रीराम की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। उन्होंने जेल प्रबंधन को इसकी जानकारी भी दी थी, लेकिन जेल अधिकारियों और डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यदि समय रहते अच्छे अस्पताल में उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी जाती, तो आज उसकी जान बच सकती थी। पीडि़त परिवार ने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जेल प्रबंधन ने सादी चुप्पी
इस घटना के बाद जेल प्रशासन का पक्ष अब तक सामने नहीं आ सका है। जेल के आला अधिकारियों ने मीडिया से पूरी तरह दूरी बना रखी है और किसी भी सवाल का जवाब देने से बच रहे हैं। जेल प्रशासन का यह रवैया मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है, जिससे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
जमीन विवाद से शुरू मामला
इस पूरे मामले की जड़ें एक पुराने पारिवारिक और जमीनी विवाद से जुड़ी हुई हैं। जानकारी के अनुसार बीते 26 अप्रैल की शाम को ग्राम कालापीपल में खेत पर मोटर चालू करने की बात को लेकर विवाद भडक़ा था। फरियादी नेपाल वर्मा के भाई अनूप सिंह वर्मा जब खेत पर गए थे, तब गांव के ही मनोज वर्मा और अनार सिंह वर्मा ने पुरानी रंजिश के चलते गाली-गलौज की और मारपीट के लिए दौड़े। अनूप जान बचाकर घर भागे, लेकिन आरोपी डंडे और चाकू लेकर उनके घर के बाहर तक पहुंच गए। जब परिवार के मुखिया कैलाश वर्मा, चंदर और नेपाल ने बीच-बचाव का प्रयास किया तो विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। इसी झड़प के दौरान मृतक श्रीराम वर्मा, सीता बाई और दुर्गाप्रसाद भी वहां पहुंचे थे। आरोप था कि अनार सिंह ने चाकू से हमला कर कैलाश वर्मा को गंभीर रूप से घायल कर दिया था, जिसके बाद लाठियां भी चली थीं, तब गांव के हरगोविन्द ठाकुर और नीरज वर्मा ने बीच-बचाव कर जान बचाई थी। इस मामले में इछावर पुलिस ने अनार सिंह, मनोज, सीता बाई, दुर्गाप्रसाद और मृतक श्रीराम वर्मा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजा था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजरें
फिलहाल जिला जेल के भीतर श्रीराम वर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, उनकी बीमारी क्या थी और मौत का वास्तविक कारण क्या है, इस पर सस्पेंस बरकरार है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और न्यायिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button