
सीहोर। भैरुंदा नगर में दो प्रमुख समस्याओं को लेकर भारी गहमागहमी देखने को मिली। एक ओर जहां नीट परीक्षा में गड़बड़ी और सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्र-छात्राओं ने सडक़ पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर पटवारी संघ ने अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बता दें नीट परीक्षा पेपर लीक मामले की गूंज अब भैरूंदा की सडक़ों पर सुनाई दे रही है। दुर्गा मंदिर चौराहे पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और सामाजिक संगठन एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठे। हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने न्याय दो-न्याय दो और शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो के जोरदार नारे लगाए। दुर्गा मंदिर चौराहे पर आयोजित इस एक दिवसीय भूख हड़ताल में विद्यार्थियों के साथ सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। पूरे दिन चले इस धरना-प्रदर्शन में छात्रों का आक्रोश साफ नजर आया। उनका कहना था कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में हुई गड़बड़ी ने मेहनती छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने ने आरोप लगाया कि बार-बार परीक्षा में गड़बड़ी सामने आना सिस्टम की बड़ी कमजोरी को दर्शाता है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो छात्रों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इस दौरान न्याय दो.न्याय दो और शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो जैसे नारे गूंजते रहे।
सोनम वांगचुक के समर्थन में भी दिखा जोश
धरना स्थल पर छात्रों ने प्रसिद्ध शिक्षाविद के समर्थन में भी आवाज बुलंद की। उन्होंने ने कहा कि उनके द्वारा उठाए जा रहे शिक्षा सुधार के मुद्दे पूरी तरह सही हैं और सरकार को उन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
शाम को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन किया समाप्त
शाम के समय सभी ने बाबा साहब की जिंदा सेना के बैनर तले एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नीट पेपर लीक मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की गई। इस दौरान उन्होंने ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन में विवेक दोगने, जितेंद्र धवन, दीपक बरखाने, रेवेंद्र पेठारी, संतोष गौर, विमलेश आरबी, संजय पटेल, राजकुमार पटेल, कपिल पेठारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
पटवारियों का आंदोलन तेज, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
इधर अपनी लंबित मांगों को लेकर पटवारी संघ का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश के बाद पटवारी काली पट्टी बांधकर काम पर लौट आए हैं और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते हुए तहसीलदार सौरभ शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 3 अगस्त से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। इससे पटवारी संवर्ग में नाराजगी और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई गई है।
काली पट्टी बांधकर कर रहे विरोध
हड़ताल के पहले चरण में 15 से 17 जुलाई तक पटवारी सामूहिक अवकाश पर रहे, जिससे राजस्व कार्य प्रभावित हुए। इसके बाद अब वे कार्यालयों में लौटकर काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं। यह विरोध का प्रतीकात्मक और शांतिपूर्ण तरीका है, जिससे शासन तक उनकी मांगों की गंभीरता पहुंच सके। साथ ही विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सरकार को अल्टीमेटम भी दिया जा रहा है।
चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रूपरेखा तैयार
पटवारी संघ ने आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम पहले ही घोषित कर दिया है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार 20 से 23 जुलाई तक काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं। इसके बाद 24 से 27 जुलाई तक सभी शासकीय व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य संचार माध्यमों का बहिष्कार किया जाएगा। वहीं 28 जुलाई से 2 अगस्त तक वेबजीआईएस, सारा एप सहित सभी ऑनलाइन कार्य बंद रखे जाएंगे। यदि इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
पटवारियों की ये हैं प्रमुख मांगें
पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में कैडर रिव्यू लागू करना, नियमित पदोन्नति, समयमान वेतनमान प्रदान करना, नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा आयोजित करना और जॉब प्रोटेक्शन एक्ट में पटवारियों को शामिल करना शामिल है। इसके अलावा वर्षों से लंबित मानदेय भुगतान और नियम विरुद्ध किए गए तबादलों को निरस्त करने की भी मांग उठाई गई है। संघ का आरोप है कि कई सरकारी योजनाओं में पटवारियों ने अपने निजी खर्च से काम किया, लेकिन आज तक भुगतान नहीं किया गया। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। वहीं पदोन्नति और कैडर रिव्यू लंबित रहने से उनका करियर भी प्रभावित हो रहा है।
जनता के काम पर दिखने लगा असर
इधर पटवारियों के इस आंदोलन का असर अब आम जनता पर भी नजर आने लगा है। नामांतरण, सीमांकन, आय जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि आंदोलन आगे बढ़ता है तो इन समस्याओं में और इजाफा होने की संभावना है।
पहले भी दिया गया था ज्ञापन
बता दें पटवारी संघ के अनुसार 8 जुलाई को भी जिलास्तर पर ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर अब प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाया गया है। संघ ने कहा कि यदि शासन ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
सरकार पर डाली जिम्मेदारी
पटवारी संघ ने स्पष्ट कहा है कि आंदोलन के कारण यदि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि आंदोलन के दौरान किसी भी पटवारी पर दमनात्मक कार्रवाई की गई तो वे तुरंत अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।