
सीहोर। जिले की बुधनी से इंदौर तक डाली जा रही नई रेलवे लाईन के लिए नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमानुसार तालाबों की मिट्टी का उपयोग संबंधित ग्राम पंचायत के लोग अपने निजी उपयोग में कर सकते हैं, लेकिन यहां तो सांठ-गांठ एवं गठजोड़ का ऐसा खेल हुआ कि लाखों रूपए की मिट्टी ही बेच डाली। रेलवे को खनिज विभाग ने अनुमति दी, इसको लेकर भी कोई जिम्मेदार बोलने को तैयार नहीं है। खनिज विभाग के अधिकारी भी मौन साधे हुए हैं। इस गठजोड़ में खनिज, रेलवे एवं संबंधित पंचायतों के जिम्मेदारों की मिलीभगत है। इधर सीहोर हलचल की खबर का असर हुआ है। रेलवे ठेकेदार द्वारा रेहटी तहसील की ग्राम पंचायत इटारसी के ग्राम मकोड़िया स्थित तालाब से निकाली जा रही मिट्टी पर अब सख्ती दिखाई गई है। मकोड़िया तालाब से हो रही खुदाई को लेकर सीहोर हलचल ने ’रेलवे ठेकेदार बना रहे तालाबों को मौत का कुआं’! शीर्षक से खबर चलाई थी। इसके बाद कार्रवाई करते हुए मशीनों को तालाब से निकाल लिया गया है।
इटारसी तालाब को भी खोद डाला, कागजों में नियम-

रेलवे ठेकेदार द्वारा रेहटी, बुधनी सहित भैरूंदा तहसील की ग्राम पंचायतों में स्थित शासकीय तालाबों को जल गंगा संवर्धन अभियान की आड़ में जमकर खोदा गया है। रेलवे ठेकेदार ने ग्राम पंचायत इटारसी सलकनपुर में स्थित तालाब को भी मिलीभगत से खोद डाला। ग्राम पंचायतों के तालाबों को खोदने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा नियम भी बनाए गए हैं, लेकिन यहां पर सांठ-गांठ का ऐसा खेल हुआ कि ये नियम सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गए। दरअसल मध्यप्रदेश शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 6-10-2007 के एक पत्र द्वारा मध्यप्रदेश के अंतर्गत तालाबों के गहरीकरण (गाद निकालने) व जीर्णोद्वार कार्यों की आयोजना व क्रियान्वयन के संबंध में सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित अन्य जिम्मेदारों को अवगत कराया गया था। विभाग के पत्र में नियमों को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे। इसमें तालाबों की मूल डिजाइन, खुदाई सहित कई महत्वपूर्ण नियम थे, लेकिन जिस तरह से रेलवे ने तालाबों को खोदा है उसमें नियमों को पूरी तरह से दरकिनार किया गया है।
खनिज विभाग के आदेश की भी हवा-

तालाबों से मिट्टी और गाद निकालने को लेकर जून-2024 में खनिज विभाग ने भी आदेश जारी किया था। खनिज संसाधन विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव ने निर्देश में कहा था कि यदि ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित अथवा संधारित किसी तालाब, स्टॉप-डेम, जल निकाय से कीचड़, गाद, मिट्टी निकाली जाती है और उसका उपयोग ग्राम पंचायत द्वारा स्वयं के विभागीय कार्यों में पूर्णतः किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में कोई रॉयल्टी देय नहीं होगी और न ही परिवहन अनुज्ञा प्राप्त करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि संबंधित शासकीय विभाग या ग्राम पंचायत इसका विक्रय नहीं कर सकेंगे और न ही विक्रय करने की अनुमति किसी को देंगे। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया था कि ग्राम स्तरीय संगठनों अथवा किसानों द्वारा कीचड़, गाद, मिट्टी का उपयोग संबंधित शासकीय विभाग अथवा ग्राम पंचायत से अनुमति प्राप्त कर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें भी किसी प्रकार की रॉयल्टी भुगतान अथवा परिवहन अनुज्ञा प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन यहां पर इन नियमों एवं आदेशों की भी हवा निकाल दी गई।
कैबिनेट बैठक में भी हुई थी मंत्रियों में इसकी चर्चा-
तालाबों से मिट्टी निकालने को लेकर पिछले दिनों मंत्रिमंडल की कैबिनेट बैठक में भी दो मंत्रियों के बीच में इसको लेकर चर्चा हुई थी। बैठक के दौरान पंचायतों के तालाबों से निकलने वाली काली मिट्टी के परिवहन को लेकर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल का तर्क था कि मिट्टी ले जाने पर जल संसाधन विभाग आपत्ति जताता है, जिससे तालाबों को गहरा करने का काम रुक रहा है, वहीं जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि काली मिट्टी के नाम पर कई जगह पीली मिट्टी का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है, इसलिए विभाग कार्रवाई करता है। इस मामले को सुलझाने के लिए तीनों विभागों की एक संयुक्त समिति बनाने के निर्देश दिए हैं, जो मिट्टी निकालने और परिवहन के नियम तय करेगी।
जिम्मेदारों ने साधा मौन-
इस मामले में खनिज विभाग सीहोर की माइनिंग इंस्पेक्टर एवं प्रभारी जिला अधिकारी खुशबू वर्मा से चर्चा करनी चाही, लेकिन नहीं हो सकी। रेलवे के प्रोजेक्ट मैनेजर ने भी फोन नहीं उठाया। सीईओ जनपद पंचायत बुधनी भी इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। रेहटी तहसील की तहसीलदार सपना झिलोरिया ने बताया कि तालाबों की खुदाई को लेकर अनुमति खनिज विभाग द्वारा दी जाती है। हम अनुमति चैक कर सकते हैं। यदि अनुमति नहीं है तो खुदाई से रोक सकते हैं।



