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सलकनपुर देवीधाम: पार्किंग में प्रसाद के नाम पर भक्तों से जबरदस्ती, सोशल मीडिया पर प्रशासन से कार्रवाई की मांग

सीहोर। देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शुमार विजयासन देवीधाम सलकनपुर में इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था के बीच व्यापारियों की आपसी खींचतान और अव्यवस्था का मुद्दा गर्मा गया है। सोशल मीडिया पर एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जिला प्रशासन और मंदिर समिति से पार्किंग क्षेत्र में हो रही मनमानी को रोकने की गुहार लगाई गई है।
वायरल मैसेज के अनुसार मंदिर की पार्किंग में 10 से 20 दुकानदार अनैतिक रूप से जाकर दर्शनार्थियों को अपनी ओर खींचते हैं। आरोप है कि ये व्यापारी पार्किंग में ही श्रद्धालुओं को घेर लेते हैं और अपनी दुकान से प्रसाद लेने का दबाव बनाते हैं। इस होड़ के कारण न केवल मंदिर की मर्यादा प्रभावित हो रही है, बल्कि भक्तों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ रसूखदार व्यापारियों की इस मनमानी के कारण पार्किंग क्षेत्र से दूर स्थित दुकानों तक ग्राहक पहुंच ही नहीं पाते। आलम यह है कि कई छोटे दुकानदारों के लिए अपनी दुकान का किराया निकालना भी मुश्किल हो रहा है। पार्किंग में जबरन ग्राहकों को बुलाने की इस परंपरा से व्यापारियों के बीच आए दिन विवाद और लड़ाई-झगड़े की स्थिति बन रही है।
पुलिस और वन विभाग के निर्देशों की अवहेलना
हैरानी की बात यह है कि पुलिस विभाग और वन विभाग द्वारा कई बार समझाइश देने और मना करने के बावजूद ये दुकानदार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर वे किसी विशेष दुकान से प्रसाद लेने से मना करते हैंए तो उन्हें गाडिय़ां हटाने तक की धमकी दी जाती है, जो कि पूरी तरह गलत है।
प्रशासन से समाधान की अपील
सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में लिखा कि देवीधाम में प्रतिदिन 500 से 1000 गाडिय़ां आती हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुगम यात्रा के लिए सोशल मीडिया पर प्रशासन से मांग है कि पार्किंग में दुकानदारों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। सलकनपुर मंदिर समिति कम से कम दो कर्मचारियों को पार्किंग में तैनात करे, जो यह सुनिश्चित करें कि वहां कोई भी व्यापारी भक्तों को परेशान न करे। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मां विजयासन का दरबार है और यहां आने वाले भक्तों की आस्था का सम्मान होना चाहिए।

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