शिवराज की किताब का सीहोर को बेसब्री से इंतजार…

सीहोर। जिलावासियों और खासकर बुधनी विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए गौरव का एक और अवसर आया है। क्षेत्र के लाडले सपूत और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अब एक लेखक के रूप में सामने आए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और उनके साथ बिताए तीन दशकों के अनुभवों पर आधारित पुस्तक ‘अपनापन’ लिखी है। जैसे ही इसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा हुई, सीहोर और बुधनी में इस किताब को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
शिवराज सिंह चौहान ने अपनी इस कृति को महज एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक साधना बताया है। उन्होंने लिखा है कि दुनिया भले ही नरेंद्र मोदी को एक कद्दावर नेता के रूप में देखती है, लेकिन उन्होंने मोदी जी के भीतर के उस साधक और कर्मयोगी को बहुत करीब से देखा है, जो देर रात तक काम करने के बाद अगली सुबह फिर उसी ऊर्जा के साथ राष्ट्र सेवा में जुट जाता है।
सीहोर से दिल्ली तक का सफर और यादें
सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले शिवराज सिंह चौहान ने किताब में 1991 की एकता यात्रा का विशेष जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि कैसे उस समय नरेंद्र मोदी ने राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र सेवा के प्रति युवाओं के दिलों में तिरंगा फराने का जज्बा पैदा किया था। जिले के लोगों का मानना है कि शिवराज जी की लेखनी में वही सरलता और आत्मीयता दिखेगी, जिसके लिए वे पूरे प्रदेश में जाने जाते हैं।
किताब की मुख्य बातें
अनुभवों का साझा: पीएम मोदी के साथ बिताए 33 वर्षों के अनछुए पहलुओं का वर्णन।
नेतृत्व की सीख: पुस्तक यह बताती है कि बड़ा बदलाव पदों से नहीं, बल्कि बड़े संकल्पों से आता है।
प्रेरणा स्रोत: यह किताब युवाओं और राजनीति में आने वाले लोगों के लिए एक मार्गदर्शिका साबित होगी।
26 मई को दिल्ली में होगा विमोचन
इस बहुप्रतीक्षित पुस्तक का विमोचन 26 मई को नई दिल्ली में किया जाएगा। सीहोर के स्थानीय कार्यकर्ताओं और आम जनता में इस बात को लेकर खासा उत्साह है कि उनके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला नेता अब देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व की जीवन यात्रा को शब्दों में पिरोकर दुनिया के सामने ला रहा है। लोगों को बेसब्री से इंतजार है कि कब यह किताब उनके हाथों में होगी।
बुधनी का विशेष लगाव
चूंकि शिवराज सिंह चौहान बुधनी के मूल निवासी हैं और वहां से उनका गहरा जज्बाती रिश्ता है, इसलिए स्थानीय लोग इसे केवल एक किताब नहीं बल्कि अपने नेता की भावनात्मक डायरी मान रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि अपनापन के जरिए वे पीएम मोदी के उस मानवीय पक्ष को जान पाएंगे जिसे शिवराज जी ने पिछले कई सालों में महसूस किया है।



