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पिता के निधन पर बेटों ने कराया नेत्रदान, दो जिंदगियों में लौटेगी रोशनी

सीहोर। कहते हैं कि दुनिया से चले जाने के बाद भी अगर किसी की आंखें इस खूबसूरत जहां को देखती रहें तो इससे बड़ा पुण्य और कोई नहीं हो सकता। ऐसा ही मानवता उदाहरण चाणक्यपुरी निवासी चौहान परिवार ने प्रस्तुत किया है। परिवार के मुखिया के निधन के बाद गहरे दुख की इस घड़ी में भी उनके पुत्रों ने समाज को एक नई दिशा दिखाने वाला प्रेरणादायी निर्णय लिया। उन्होंने अपने पिता के मरणोपरांत स्वप्रेरणा से उनका नेत्रदान कराकर समाज को मानव सेवा का एक बड़ा संदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार चाणक्यपुरी निवासी शिवराज सिंह चौहान का निधन हो गया था। पिता के असमय चले जाने से जहां पूरा परिवार गहरे शोक और आंसुओं में डूबा हुआ था, वहीं उनके सुपुत्रों सुनील चौहान एवं अनिल चौहान ने इस अत्यंत कठिन समय में भी धैर्य और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया।
दोनों भाइयों ने आपसी सहमति से तय किया कि वे अपने स्वर्गीय पिता की आंखों को हमेशा के लिए बंद नहीं होने देंगे, बल्कि उनके जरिए किसी जरूरतमंद के जीवन के अंधेरे को दूर करेंगे। पुत्रों ने स्वप्रेरणा से पिता का नेत्रदान कराने की इच्छा व्यक्त की, जिसका पूरे परिवार ने समर्थन किया।
मेडिकल कॉलेज की टीम ने प्रक्रिया की पूरी
इस कार्य की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग तुरंत सक्रिय हुआ। सिविल सर्जन डॉ. यूके ने बताया कि जैसे ही पीडि़त परिवार की ओर से नेत्रदान की सहमति और इच्छा जताई गई, तत्काल भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज के नेत्र बैंक को सूचित किया गया।
भोपाल से आई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सीहोर पहुंचकर सभी आवश्यक और तय चिकित्सीय प्रक्रियाओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ पूरा किया और सफलतापूर्वक नेत्रदान संपन्न कराया। स्वर्गीय शिवराज सिंह चौहान की ये आंखें अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में फिर से उजियारा लेकर आएंगी। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव ने चौहान परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेत्रदान वास्तव में महादान है।

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