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एसपी सक्सेना के मानवीय व्यवहार से जनसुनवाई में उमड़ी पीडि़तों की भीड़, आरामदायक कुर्सियों पर बिठाकर सुन रहीं पीड़ा

सीहोर। पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना की कार्यशैली, संवेदनशीलता और जनता के प्रति उनके सहयोगात्मक व्यवहार का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। यही वजह है कि पुलिस कार्यालय में होने वाली साप्ताहिक जनसुनवाई में अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले पीडि़तों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लोग इस उम्मीद के साथ आ रहे हैं कि यहां उनकी बात न सिर्फ सुनी जाएगी, बल्कि उसका सही समाधान भी होगा।
आज मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में मानवीय और अनूठा नजारा देखने को मिला। एसपी कार्यालय पहुंचने वाले पीडि़तों और बुजुर्गों को परेशान न होना पड़े, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना ने जनसुनवाई में आए आवेदकों को सम्मानपूर्वक आरामदायक कुर्सियों पर बिठाया और बेहद गंभीरता व शालीनता के साथ एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं। पुलिस कप्तान के इस संवेदनशील व्यवहार ने दूर-दराज से आए ग्रामीणों और पीडि़तों के मन से पुलिस का डर दूर कर दिया और उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे 32 आवेदक
आज की जनसुनवाई में जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से कुल 32 आवेदक अपनी-अपनी शिकायतें लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे थे। प्राप्त शिकायतों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मामले शामिल थे, जिनमें विभिन्न अपराधों में त्वरित पुलिस कार्रवाई न होने से जुड़ी शिकायतें। परिवारों के आपसी मतभेद और जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद शामिल रहे।
संतुष्टिपूर्ण समाधान के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान एसपी सोनाक्षी सक्सेना ने सभी 32 आवेदकों की समस्याओं को पूरी गंभीरता से डायरी में नोट किया। मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने मौके से ही संबंधित थाना प्रभारियों और राजपत्रित अधिकारियों (सीएसपी/एसडीओपी) को फोन पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
एसपी ने सख्त लहजे में कहा कि जनता की शिकायतों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर और तय समय सीमा में होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामलों की जांच त्वरित और संतुष्टिपूर्ण तरीके से की जाए ताकि पीडि़तों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। एसपी की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से जनसुनवाई में आए नागरिकों ने राहत की सांस ली है।

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