
सीहोर। जिले में लकड़ी माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे पुलिस और वन विभाग की टीम को चकमा देने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। ताजा मामला रायसेन जिले के देलावाड़ी क्षेत्र का है, जहां तस्करों ने जांच वन अमले की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक कार पर आरटीओ (परिवहन विभाग) की प्लेट लगा रखी थी। इस गाड़ी के जरिए अवैध रूप से कीमती सागौन की लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था। हालांकि वन विभाग की मुस्तैदी के कारण तस्करों का यह हाईटेक प्लान फेल हो गया और विभाग ने गाड़ी सहित कीमती लकड़ी जब्त कर ली।
जानकारी के अनुसार वन विभाग की टीम को क्षेत्र में एक संदिग्ध वाहन की आवाजाही की सूचना मिली थी। जब टीम ने वाहन को देखा तो उस पर आरटीओ लिखा हुआ था, ताकि कोई उसे रोकने की हिम्मत न करे। लेकिन वाहन की गतिविधियों को देखकर वन विभाग की टीम को शक हुआ, जिसके बाद टीम ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। वन विभाग को पीछे आता देख तस्करों में हडक़ंप मच गया। हर बार की तरह इस बार भी लकड़ी तस्कर घने जंगल और मौके का फायदा उठाकर वाहन को रास्ते में ही छोडक़र भागने में सफल रहे।
होशंगाबाद पासिंग गाड़ी से मिलीं सागौन की सिल्लियां
मामले की पुष्टि करते हुए देलावाड़ी के रेंज अधिकारी प्रशांत खरे ने बताया कि वन विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए आमडो के पास घेराबंदी कर इस गाड़ी को पकड़ा है। जब गाड़ी की तलाशी ली गई तो उसके भीतर से भारी मात्रा में अवैध सागौन की कीमती सिल्लियां बरामद हुईं। रेंज अधिकारी ने बताया कि पकड़ी गई गाड़ी होशंगाबाद पासिंग की है। तस्करों ने वन विभाग और पुलिस को भ्रमित करने के लिए गाड़ी पर आरटीओ की प्लेट लगा रखी थी, ताकि नाकों और चेकिंग पॉइंट पर उन्हें कोई न रोके।
गाड़ी मालिक पर कसेगा शिकंजा
फिलहाल वन विभाग ने सागौन की लकडिय़ों सहित तस्करों के वाहन को जब्त कर लिया है और अज्ञात तस्करों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। भले ही तस्कर मौके से फरार होने में कामयाब रहे हों, लेकिन गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर असली मालिक और इस तस्करी के नेटवर्क से जुड़े लोगों का पता लगाया जा रहा है।