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कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ, महंत प्रज्ञा भारती बोलीं- मोह ही दु:ख की जड़

सीहोर। शहर की जयंती कॉलोनी रविवार से राममय हो गई है। यहां आयोजित 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ, प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव और श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत शहर के जगदीश मंदिर से निकली एक विशाल कलश यात्रा के साथ की गई, जिसमें भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।

रविवार सुबह जगदीश मंदिर परिसर में भव्य आतिशबाजी के साथ कलश यात्रा का श्रीगणेश हुआ। यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे के सानिध्य में निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में साधु-संत, कथा वाचक और सिर पर कलश धारण किए महिलाएं शामिल हुईं। यात्रा का शहर में जगह-जगह पुष्प वर्षा और आरती के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर, यज्ञाचार्य पंडित दीपक शास्त्री और पंडित अनिल शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
पहले दिन के धार्मिक अनुष्ठान
महोत्सव के पहले दिन कलश यात्रा के साथ-साथ पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश, जलाधिवास और राम रक्षा स्रोत का पाठ किया गया। शाम को आयोजित मानस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ लिया।
सांसारिक मोह को छोड़ प्रभु की शरण में आएं
वृंदावन से पधारीं प्रख्यात रामकथा व्यास मानस कोकिला महंत डॉ. प्रज्ञा भारती ने कथा के पूर्व श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रभु उसी भक्त को अपनी ओर खींचते है,ए जो किसी महापुरुष का आश्रय लेता है और अनन्य भाव से उनकी शरण में जाता है। महंत प्रज्ञा भारती ने मोह-माया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संसार में प्रेम और स्नेह जरूरी है, लेकिन मोह दु:ख की जड़ है। सांसारिक वस्तुओं का मोह अंतत: कष्ट ही देता है। इंसान का असली मित्र केवल उसका धर्म है, जो जीवन के साथ भी और मृत्यु के बाद भी साथ रहता है।
रामलीला और कथा का संगम
आयोजन समिति ने बताया कि सोमवार को देव स्थापना, अग्नि स्थापनाए हवन और अन्नाधिवास जैसे अनुष्ठान संपन्न होंगे। दोपहर में महंत प्रज्ञा भारती के मुखारविंद से श्रीराम कथा की शुरुआत होगी। वहीं रात्रि के समय महाकाल मंडल द्वारा भव्य रामलीला का मंचन किया जाएगा, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा।

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