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प्रदोष पर 108 पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण का श्रद्धालुओं द्वारा किया जाएगा

शिव प्रदोष सेवा समिति के तत्वाधान में दो दर्जन से अधिक ब्राह्मणों के द्वारा किया गया सवा लाख महामृत्युंजय मंत्रों का जाप

सीहोर। सावन-भादो मास में भगवान शिव जी का अभिषेक पुण्यकारी माना जाता है और जल के बाद पंचामृत का अभिषेक ही महादेव का पसंदीदा माना जाता है। पंचामृत की शास्त्रों में खास महिमा बताई गई है और इसे अमृत समान माना गया है। पंचामृत जिन 5 चीजों के मेल से बनता है, उन सभी की अपनी खूबियों होने के साथ आध्यात्मिक कारण भी हैं। इन 5 चीजों को वैसे भी पूजा-पाठ में अहम स्थान दिया गया है। शहर के पावर हाउस चौराहे के समीपस्थ श्रीमैढ क्षत्रिय सोनी समाज के नगराध्यक्ष विजय सोनी निवास पर क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए शिव प्रदोष सेवा समिति के तत्वाधान में दो दर्जन से अधिक ब्राह्मणों के द्वारा सवा लाख महामृत्युंजय मंत्रों के जाप के साथ यहां पर पार्थिव शिव लिंग का निर्माण किया गया। अब बुधवार को प्रदोष पर पंचामृत से महाभिषेक किया जाएगा।
मंगलवार को एकादशी के पावन अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं द्वारा इस मौके पर समिति के संस्थापक धर्माचार्य पंडित पवन व्यास ने बताया कि महामृत्युंजय मंत्रों का जाप किया जा रहा था। शिव की पूजा और अर्चना कभी भी निष्फल नहीं जाती है, देवता मंत्र के अधीन रहते हैं, मंत्र शक्ति का व्यापक प्रभाव है। शिव पुराण में मंत्रों की साधना व सिद्धि का विशेष उल्लेख किया गया है। मंत्रों का अनुष्ठान व वाचन ठीक ढंग से किया जाए तो त्वरित फल दिखाई पड़ता है। महादेव देवों के देव के नाम से जाने जाते हैं। महादेव के बारे में यह कहा जाता है कि वह भक्तों की पुकार जल्द सुनकर उनके दुख दर्द दूर करते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों पर जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। जटाधारी शिव शंकर को प्रसन्न करने में किसी भी मनुष्य को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है।
शिवजी के महामृत्युंजय मंत्र को महामंत्र कहा जाता है
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है कि महादेव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और इसके सामने यमराज को भी हार माननी पड़ती है। उन्होंने कहा कि शिवजी के महामृत्युंजय मंत्र को महामंत्र कहा जाता है। इसमें भगवान शिव के महामृत्युंजय रूप से लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है। यह मंत्र कई तरह से प्रयोग में लाया जाता है। शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु से बचने के लिए महामृत्युंजय जप करने का विशेष उल्लेख मिलता है। महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को खुश करने का महामंत्र है। प्रदोष पर 108 पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण का श्रद्धालुओं द्वारा किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पंडित पवन व्यास, मनोज दीक्षित मामा, कुणाल व्यास आदि शामिल थे।

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