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कागजी कार्रवाई में उलझा खनिज विभाग, जमीनी हकीकत में माफियाओं के हौसले बुलंद

सीहोर। जिले में खनिज माफियाओं के आगे खनिज विभाग पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रहा है। कहने को तो गुरुवार को कलेक्ट्रेट में जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित कर बड़े-बड़े निर्देश दिए गए, लेकिन हकीकत यह है कि विभाग केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर अपनी पीठ थपथपा रहा है। कलेक्टर बालागुरू के. और एसपी दीपक कुमार शुक्ला की मौजूदगी में विभाग ने कार्रवाई के जो आंकड़े पेश किए, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि विभाग केवल छोटे शिकार (ट्रैक्टर-ट्रॉली) तक सीमित है, जबकि बड़े मगरमच्छ आज भी गिरफ्त से बाहर हैं।
बैठक में खनिज विभाग ने गर्व से बताया कि 1 अप्रैल 2025 से अब तक 300 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए और सवा करोड़ से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में केस दर्ज होने के बावजूद अवैध उत्खनन रुक क्यों नहीं रहा। 218 ट्रैक्टर-ट्रॉली और कुछ डंपर जब्त कर विभाग अपनी सक्रियता का ढिंढोरा पीट रहा है, जबकि जिले की नदियों और खदानों का सीना छलनी करने वाली बड़ी मशीनें और सिंडिकेट पर विभाग हाथ डालने से कतरा रहा है।
संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी सिर्फ फाइलों तक
कलेक्टर ने उन क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए हैं जहां से अवैध उत्खनन की सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह निर्देश हर बैठक में दिए जाते हैं, लेकिन जिला खनिज अधिकारी धर्मेंद्र चौहान और उनका अमला उन हॉटस्पॉट्स पर पहुंचने में हमेशा नाकाम साबित होता है। 19 दिसंबर 2025 से 25 फरवरी 2026 के बीच महज 66 प्रकरणों की कार्रवाई विभाग की सुस्त रफ्तार और माफियाओं के साथ कथित साठगांठ की ओर इशारा करती है।
राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य या माफियाओं को संरक्षण
भले ही बैठक में खनिज राजस्व प्राप्ति में कोताही न बरतने की बात कही गई हो, लेकिन जमीनी हकीकत में अवैध भंडारण और परिवहन बेखौफ जारी है। रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े खनिज संपदा की लूट हो रही है और खनिज विभाग केवल बैठकें कर औपचारिकता पूरी कर रहा है। जब तक विभाग पनडुब्बियों और बड़ी मशीनों के मालिकों पर सख्त कानूनी शिकंजा नहीं कसता, तब तक ऐसी टास्क फोर्स बैठकों का कोई ठोस नतीजा निकलना नामुमकिन लग रहा है।

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