भक्ति से सरल होता है मुक्ति का मार्ग: पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर। मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक दिन किसी न किसी अच्छे कार्य के लिए समर्पित करना चाहिए। आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और भगवान पर अटूट विश्वास जीवन को सफल बनाते हैं। जब मनुष्य स्वयं को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करता है, तभी वह समाज और राष्ट्र के लिए भी उपयोगी बनता है। भक्ति से सरल होता है मुक्ति का मार्ग, अहंकार और छल कपट का करें त्याग और बालमन से भक्ति मार्ग को सरल करें।
उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम पर जारी सात दिवसीय आन लाइन शिव महापुराण कथा के दौरान अपने प्रवचन में कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। ऑनलाइन शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं को भक्ति, मुक्ति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के विषय में प्रेरणादायी संदेश दिए गए। कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने श्रद्धालुओं को अहंकार, छल कपट और सच्ची भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि अहंकार, छल और कपट का त्याग किए बिना भगवान शिव की कृपा प्राप्त नहीं की जा सकती। मनुष्य का हृदय जितना निर्मल और निष्कपट होगा, वह उतना ही ईश्वर के निकट पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि भगवान को बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम, सरलता और निष्कलंक भाव प्रिय है।
भगवान की भक्ति आत्मिक शांति प्रदान करती
वहीं पंडित मिश्रा ने भक्ति और मुक्ति के संबंध में कहा कि जो व्यक्ति मुक्ति की इच्छा रखता है, उसे सबसे पहले भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। जब मनुष्य भक्ति को पकड़ लेता है, तब मुक्ति का मार्ग स्वयं सरल हो जाता है। भगवान की सच्ची भक्ति जीवन के सभी दुखों और भ्रमों को दूर कर आत्मिक शांति प्रदान करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भक्ति शबरी जैसी होनी चाहिए। शबरी ने वर्षों तक धैर्य, विश्वास और समर्पण के साथ प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा की और अंतत: भगवान स्वयं उनके द्वार पहुंचे। यही सच्ची भक्ति है जिसमें न अधीरता हो, न स्वार्थ, केवल अटूट विश्वास और प्रेम हो। पंडित मिश्रा ने कहा कि भक्ति का अर्थ केवल पूजा पाठ करना नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार में सत्य, सेवा, करुणा, विनम्रता और सदाचार को अपनाना भी सच्ची भक्ति है। भगवान शिव अपने भक्त के प्रेम और विश्वास को देखते हैं, न कि उसके धनए पद या वैभव को। कथा के दौरान विश्व के लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन माध्यम से जुडक़र प्रवचन का श्रवण किया।



