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इस बार 59 दिनों का होगा ज्येष्ठ मास, पुरुषोत्तम मास के संयोग में जल-अन्न दान का मिलेगा अनंत फल

सीहोर। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत् 2083 के अनुसार वर्ष 2026 धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष होने जा रहा है। इस बार ज्येष्ठ मास की अवधि सामान्य 30 दिनों के बजाय पूरे 59 दिनों की होगी। कल शनिवार से विशाखा नक्षत्र में ज्येष्ठ मास का शुभारंभ हो रहा है, जो 29 जून सोमवार तक चलेगा। इस वर्ष ज्येष्ठ के महीने में ही पुरुषोत्तम अधिक मास का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में आध्यात्मिक उन्नति और दान-पुण्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार भगवान सूर्य और चंद्रमा की राशि भ्रमण गति में अंतर होने के कारण हिंदू पंचांग में हर तीन साल में एक अतिरिक्त मास अधिक मास की आवश्यकता होती है। वर्ष 2026 में यह अतिरिक्त महीना ज्येष्ठ मास में लग रहा है। 17 मई रविवार से 15 जून सोमवार सोमवती अमावस्या तक पुरुषोत्तम अधिक मास रहेगा। इस दौरान गंगा दशहरा जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी मनाए जाएंगे।
जल और अन्न दान का विशेष महत्व
पंडित शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में जल सेवा को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस महीने में प्याऊ लगवाना, पशु-पक्षियों और गौमाता के लिए जल की व्यवस्था करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है। अधिक मास में किया गया दान, जप और तप कभी समाप्त नहीं होता। इस दौरान तीर्थ नदियों में स्नान करने मात्र से साधक के सभी दोषों का शमन हो जाता है।
पुरुषोत्तम मास में क्या करें श्रद्धालु
जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित इस पवित्र महीने में श्रद्धालुओं को कुछ विशेष धार्मिक अनुष्ठान करने चाहिए, प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करें और विष्णु सहस्त्रनाम या सत्यनारायण कथा का श्रवण करें। भगवान विष्णु की प्रिय तुलसीजी की सेवा करें और शाम के समय तुलसी क्यारे के पास दीप दान करें। सामथ्र्य अनुसार गरीबों को अन्न, जल, मिट्टी के घड़े, सत्तू और फल दान करें। अधिक मास में उपवासए मौन जप और सात्विक जीवन का विशेष फल मिलता है।
धार्मिक उत्सवों की रहेगी धूम
59 दिनों की इस लंबी अवधि में धार्मिक उत्सवों का उत्साह भी दोगुना रहेगा। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। मान्यता है कि अधिक मास में की गई पूजा अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होती है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार यह समय स्वयं को ईश्वर की भक्ति में लीन करने और जरूरतमंदों की सेवा कर पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ अवसर है।

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