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आंवली घाट पर सुरक्षा के कड़े पहरे, चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेगा पुलिस बल

सीहोर। भूतड़ी अमावस्या के पावन पर्व पर नर्मदा तट आंवली घाट पर उमडऩे वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के मार्गदर्शन में सुरक्षा व्यवस्था का खाका तैयार कर बल को तैनात कर दिया गया है।
आंवली घाट की सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ बाहरी जिलों से आया पुलिस बल, होमगार्ड, विशेष सशस्त्र बल और ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों को तैनात किया गया है। विशेष रूप से नदी के घाटों पर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम को कमान सौंपी गई है।
अधिकारियों ने दी ब्रीफिंग, बताए ड्यूटी के कड़े नियम
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत ने ड्यूटी पर तैनात सभी जवानों और अधिकारियों को ब्रीफिंग देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नदी घाटों पर पैनी नजर: डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए घाटों पर तैनात बल को सूक्ष्म निगाह रखने और लगातार मोबाइल पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
महिला सुरक्षा सर्वोपरि: मेले में आने वाली महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस को विशेष रूप से मुस्तैद रहने को कहा गया है।
यातायात और पार्किंग: श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए पार्किंग और रास्तों पर संकेतक लगाए गए हैं, ताकि ट्रैफिक जाम की स्थिति न बने।
फिक्स पिकेट्स: ड्यूटी पॉइंट पर तैनात जवान अपने आसपास के क्षेत्र की सतत निगरानी करेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाली कमान
इस दौरान एसडीओपी बुधनी रवि शर्मा, एसडीओपी सीहोर पूजा शर्मा, रक्षित निरीक्षक उपेंद्र यादव और यातायात प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल उपस्थित रहा। ब्रीफिंग के तुरंत बाद सभी जवानों को उनके निर्धारित पॉइंट और घाटों के लिए रवाना कर दिया गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और नदी के गहरे पानी में न जाएं।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.