कोसमी से भोपाल तक आदिवासियों का पैदल मार्च जारी, 17 अक्टूबर को सीएम हाउस घेराव, कांग्रेस का प्रतिनिधि भी धरने में हुआ शामिल

सीहोर। जिले की भैरूंदा तहसील के कोसमी गांव में वन विकास निगम द्वारा आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और खेत बर्बाद किए जाने के मामले में राजनीति और आंदोलन दोनों तेज हो गए हैं। अपनी मांगों और न्याय की आस में 2 हजार से अधिक आदिवासी महिला-पुरुष और बच्चे कोसमी से भोपाल के लिए पैदल पदयात्रा पर निकले हुए हैं। पदयात्री सीहोर-बिलकिसगंज मार्ग से होते हुए भोपाल की ओर बढ़ रहे हैं और 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की तैयारी में हैं।
राजधानी की ओर बढ़ रहे आंदोलनकारियों ने यात्रा को व्यवस्थित रखने के लिए रास्ते में दो प्रमुख पड़ाव तय किए हैं। पहला पड़ाव कोनियाझिरी में रात्रि विश्राम और भोजन के बाद यात्रा आगे बढ़ेगी। जबकि दूसरा पड़ाव बैरागढ़ में रहेगा, जिसके बाद सभी आंदोलनकारी एकजुट होकर सीधे भोपाल पहुंचेंगे। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे इस बार केवल मौखिक आश्वासनों पर वापस नहीं लौटेंगे। जब तक कोसमी में तोड़ी गई 12 झोपडिय़ां, नष्ट की गई फसलों और पाटे गए कुओं के मामलों में न्याय नहीं मिलता, तब तक वे भोपाल में ही डेरा डालकर प्रदर्शन जारी रखेंगे। उनकी मांग है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो, पीडि़त परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास मिले तथा वर्षों से काबिज आदिवासियों को भूमि के पट्टे दिए जाएं।
कांग्रेस का सीधा हमला, बीजेपी नेताओं के मसीहा बनने पर उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पार्टी ने भी पूरी ताकत से कूदते हुए सरकार और सत्ता पक्ष के नेताओं पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल 14 अक्टूबर की शाम कोसमी पहुंचकर धरने पर बैठा और पीडि़त परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव कानूनी व न्यायिक मदद का भरोसा दिया।
पूर्व शिक्षा मंत्री राजकुमार पटेल ने दो दिन पहले यानि 13 अक्टूबर को ही सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब भाजपा के अपने ही वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने ही कार्यकाल में जनता और आदिवासी भाइयों के काम नहीं करा पा रहे और अब घडिय़ाली आंसू बहाने को मजबूर हैं तो समझ लीजिए हालात किस हद तक बिगड़ चुके हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह आदिवासियों के कंधे पर बंदूक रखकर अपना राजनीतिक एजेंडा सेट करने या कुर्सी की लड़ाई में आदिवासियों को ढाल बनाने का असफल प्रयास तो नहीं है।
इधर धरने में शामिल कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव गुजराती ने कोसमी में हुई कार्रवाई को बर्बरता की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के क्षेत्रीय नेता और जनप्रतिनिधि खुद को हमदर्द बताकर नाटक कर रहे हैं, जबकि पर्दे के पीछे अधिकारियों से यह सब करवाया जाता है और फिर जनता के बीच जाकर मसीहा बनने की नाकाम कोशिश की जाती है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों द्वारा 15 तारीख से शुरू की गई भोपाल पदयात्रा और 17 अक्टूबर के सीएम हाउस घेराव को पार्टी का पूरा समर्थन है।

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