शासकीय राशि की बर्बादी, एक दशक बाद भी अधूरा पड़ा सामुदायिक भवन, ग्रामीण परेशान

सीहोर। ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में सुविधा हो, इस उद्देश्य से शासन द्वारा सामुदायिक भवनों का निर्माण कराया जाता है। लेकिन इछावर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत नयापुरा में व्यवस्था और जिम्मेदारी की पोल खोलता एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां विधायक निधि से स्वीकृत सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य लगभग एक दशक बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में ग्राम पंचायत नयापुरा में सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए 10 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। निर्माण कार्य शुरू कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत को पहली किश्त के रूप में 4 लाख रुपए की राशि आवंटित भी कर दी गई। आरोप है कि तत्कालीन सरपंच और सचिव ने भवन निर्माण के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितताएं बरतीं। जितनी राशि आहरित की गई, उसके अनुरूप मौके पर कार्य नहीं कराया गया।
मूल्यांकन में खुली पोल, अटक गई अगली किश्त
जब संबंधित इंजीनियर द्वारा कराए गए निर्माण कार्य का मूल्यांकन किया गया तो उसमें भारी वित्तीय गड़बडिय़ां और अनियमितताएं पाई गईं। मूल्यांकन रिपोर्ट में खामियां सामने आने के बाद शासन द्वारा अगली किश्त की राशि रोक दी गई। नतीजा यह हुआ कि निर्माण कार्य वहीं ठप पड़ गया और भवन आज तक अधूरा खड़ा है।
इमारत हुई जर्जर, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ
देखरेख के अभाव में अधूरा बना यह भवन अब खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुका है। दीवारें सीलन और पानी लगने से जर्जर हो चुकी हैं। भवन की बुनियाद कमजोर पड़ रही है और परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। शासकीय धनराशि के इस दुरुपयोग का खामियाजा अब पूरे गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अधूरा रिकॉर्ड और पुरानी अनियमितता दर्ज होने के कारण गांव में नया सामुदायिक भवन भी स्वीकृत नहीं हो पा रहा है। ऐसे में छोटे-छोटे सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसने क्या कहा
– सामुदायिक भवन अधूरा पड़ा है और इसकी वजह से नया भवन भी स्वीकृत नहीं हो पा रहा है। पूर्व सरपंच और सचिव ने राशि का गबन किया, जिससे छोटे-छोटे आयोजनों के लिए भी पूरा गांव परेशान हो रहा है।
रूपसिंह ठाकुर, सरपंच ग्राम पंचायत नयापुरा
– पहली किश्त के रूप में 4 लाख रुपए मिले थे, जिसका काम करवाया गया था। उसके बाद अगली किश्त मिली ही नहीं। अब वहां क्या स्थिति है, मुझे जानकारी नहीं है क्योंकि मैं अब दूसरी पंचायत में हूं।
राजेन्द्र विश्वकर्मा, तत्कालीन सचिव
– यह मामला फिलहाल मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं फाइलें और स्थिति दिखवाती हूं कि आखिर क्या हुआ था। यदि निर्माण कार्य या राशि के उपयोग में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रूशाली पोरस, सीईओ जपं. इछावर



