जब इंसानियत बनी ढाल, राख के ढेर से इस तरह जगी जिंदगी की नई उम्मीद
मंडी चौराहे के अग्निकांड पीडि़त दुकानदारों को सौंपे 1 लाख 40 हजार रुपये, सीहोर से सिंगापुर तक जुड़े मददगार

सीहोर। आज के दौर में सोशल मीडिया का उपयोग हर कोई कर रहा है। अक्सर लोग घंटों रील्स और टाइमपास में अपना कीमती समय बर्बाद कर देते हैं, लेकिन यदि इसी तकनीक का सही नीयत और सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल किया जाए तो यह किसी गिरते हुए इंसान को संबल देने का सबसे बड़ा जरिया बन सकती है। इसकी एक अद्भुत मिसाल सीहोर शहर में देखने को मिली, जहां सोशल मीडिया के जरिए पीडि़त व्यापारी को फिर से खड़े होने का हौसला मिला।

बता दें शहर के मण्डी चौराहे पर युवा व्यवसायी नीतिन साहू, शैलेंद्र शिवहरे की एनके इंटरप्राइजेज नाम से जूते-चप्पल की दुकान है। इस दुकान में शुक्रवार-शनिवार की रात अज्ञात कारणों से आग लग गई थी। इस आगजनी में दुकान में रखा पूरा माल राख के ढेर में तब्दील हो गया। दोनों व्यवसायी परेशान और हताश हो गए। इस आगजनी ने दोनों युवा व्यापारियों का सब कुछ छीन लिया। जब उम्मीद के सारे दिए बुझ चुके थे, तब सीहोर के लोगों ने इंसानियत की जो मिसाल पेश की, वह किसी सपने से कम नहीं थी। सामाजिक संगठन टीम संडे का सुकून की एक पहल ने साबित कर दिया कि नीयत साफ हो तो ईश्वर भी मदद के रास्ते खोल देता है।
एक फेसबुक पोस्ट और जाग उठी शहर की चेतना
रविवार सुबह करीब 8.25 बजे टीम के सदस्य अंकुर राठौर ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी। रील्स में समय बिताने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का यह ऐसा सदुपयोग था, जिसने शहर की चेतना जगा दी। उन्होंने शहरवासियों से केवल 500-500 रुपये के योगदान का आग्रह किया। अपील के महज 5 मिनट बाद मदद का पहला हाथ बढ़ा और सिर्फ 8 घंटे में 66 हजार 800 रुपये एकत्रित हो गए।
देश-विदेश से 100 से अधिक मददगार, जुटाए 1.40 लाख रुपये
सोशल मीडिया की ताकत से यह कारवां सीहोर तक सीमित नहीं रहा। डॉक्टर, शिक्षक, व्यापारी और जनप्रतिनिधियों से लेकर दिल्ली व उत्तर प्रदेश तक से सहयोग मिला। यहां तक कि सिंगापुर में रह रहे एक प्रवासी भारतीय ने फेसबुक पर खबर देख तुरंत मदद भेजी। करीब 100 लोगों व टीम सदस्यों के प्रयास से कुल 1 लाख 40 हजार रुपये जुटाए गए, जिसे मंगलवार को जिला अस्पताल परिसर में पीड़ित व्यापारियों को सौंपा गया।
विपत्ति में बीमा ही सच्चा साथी
सहयोग राशि भेंट करते हुए टीम सदस्यों ने कहा कि यह मदद भले ही पूरे नुकसान की भरपाई न करेए पर पीडि़तों को यह अहसास कराती है कि शहर उनके साथ है। इसके साथ ही टीम ने सभी व्यापारियों से अपील की कि दुकान चाहे छोटी हो या बड़ी, उसका बीमा जरूर करवाएं ताकि भविष्य में किसी अनहोनी के समय आर्थिक सुरक्षा मिल सके।



