
सीहोर। गणेशोत्सव के दूसरे दिन 15 सितंबर को पूरे सीहोर शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल है। प्राचीन एवं सिद्ध पीठ चिंतामन गणेश मंदिर में सुबह से ही भगवान विघ्नहर्ता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। मंदिर परिसर जय गणेश देवा और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गुंजायमान है। सीहोर के अलावा आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
बता दें चिंतामन गणेश मंदिर में स्थापित प्रतिमा की आंखों को लेकर एक बेहद अद्भुत और प्राचीन इतिहास है। वर्तमान में प्रतिमा की आंखें चांदी की बनी हुई हैं, लेकिन पहले यहां भगवान की आँख में बहुमूल्य हीरा जड़ा हुआ था। करीब 150 साल पहले तक मंदिर परिसर रात में भी खुला रहता था और सुरक्षा के लिए ताले नहीं लगाए जाते थे। उसी दौर में अज्ञात चोरों ने प्रतिमा से हीरे की आंख चुरा ली थी।
स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार आंख चोरी होने के बाद कई दिनों तक उस खाली जगह से चमत्कारिक रूप से दूध की धार टपकती रही। इसके बाद भगवान गणपति ने मुख्य पुजारी को स्वप्न में दर्शन देकर उस स्थान पर चांदी की आंख लगाने का आदेश दिया।
चांदी की आंख के साथ हुआ ‘भगवान का नया जन्म’
पुजारी और नगरवासियों ने स्वप्नादेश के बाद प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक चांदी की आंख स्थापित की। इस अलौकिक घटना को भगवान चिंतामन गणेश के नए जन्म के रूप में स्वीकार किया गया और इस खुशी में पूरे नगर के लिए एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। उसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में हर साल यहां गणेश उत्सव के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जो आज भी जारी है।
भगवान का किया आकर्षक श्रंगार
बता दें गणेशोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को सुबह मंदिर में भव्य महाआरती संपन्न हुई, जिसके पश्चात भगवान श्री गणेश का मनमोहक श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने सुगम दर्शन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
झूले और दुकानें बनी आकर्षण का केंद्र
गणेश उत्सव के पावन अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास के विशाल मैदान में 12 दिनों के पारंपरिक मेले की शुरुआत हो चुकी है। मेले में बच्चों और युवाओं के लिए छोटे-बड़े झूले लगाए गए हैं। साथ ही खान पान की दुकानों, खिलौनों और हस्तशिल्प के बाजारों से पूरा मेला परिसर सज गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं। पूरे मंदिर और मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए मंदिर की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।