गुरु का होगा इस राशि में परिवर्तन, इन राशियों पर होगा असर

वृश्चिक लग्न तथा वृश्चिक चन्द्र राशि के लिए 2 जून 2026 से देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर नवम भाव में होगा। कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं, अतः यह गोचर धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा, गुरु कृपा, पुण्य संचय विदेश संबंधी कार्यों तथा जीवन के समग्र विस्तार के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना जाएगा। शास्त्रों ने नवम भाव को त्रित्रिकोण कहा है। अर्थात् सभी त्रिकोणों में सर्वोत्तम और गुरु नवम भाव के कारक ग्रह हैं और परम उच्च होकर अपने कारक भाव में देवगुरु बैठें तो कहना ही नहीं कि वृश्चिक राशि वालों के लिए यह भाग्योदय काल होगा। नवम भाव भाग्य, धर्म, पिता, गुरु, तीर्थयात्रा, उच्च शिक्षा, नैतिकता, जीवन दर्शन तथा ईश्वर कृपा का भाव माना जाता है। उच्च का बृहस्पति जब नवम भाव में आता है तो इसे गोचर के श्रेष्ठतम परिणामों में से एक माना जाता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य अचानक गति पकड़ सकते हैं। जिन कार्यों में बार-बार बाधाएं आ रही थीं, उनमें अब भाग्य का सहयोग मिलने लगेगा। जीवन में सही मार्गदर्शक, योग्य गुरु अथवा प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। इस समय धार्मिक कार्यों, पूजा पाठ, प्रवचन आदि सुनने में आपकी रुचि जागृत होगी। नौकरीपेशा जातकों के लिए यह गोचर उन्नति के नए द्वार खोल सकता है। स्थानांतरण, पदोन्नति, उच्च अधिकारियों की कृपा तथा कार्यक्षेत्र में सम्मान प्राप्त होने की संभावना बनेगी। विशेष रूप से जून 2026 से अक्टूबर 2026 के मध्य करियर संबंधी महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हो सकते हैं। जो लोग शिक्षा, कानून, प्रशासन, अध्यापन, धर्म, दर्शन, शोध, विदेश व्यापार अथवा परामर्श कार्यों से जुड़े हैं, उनके लिए यह गोचर अत्यंत शुभ सिद्ध हो सकता है। आप समाज में मार्गदर्शक की भूमिका में देखे जाएंगे। देवगुरु की पंचम दृष्टि आपके लग्न अर्थात प्रथम भाव पर पड़ेगी। इससे व्यक्तित्व में आकर्षण, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता तथा सामाजिक सम्मान में वृद्धि होगी। मानसिक परिपक्वता बढ़ेगी और लोग आपके विचारों को महत्व देंगे। यदि कहा जाए कि देवगुरु अपनी अमृत दृष्टि आपके लग्न पर देकर आपके व्यक्तित्व में गुरुत्व लाएंगे तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी, इस समय आप भीड़ में सबसे अलग चमकेंगे। सप्तम दृष्टि तृतीय भाव पर होने से साहस, पराक्रम, संचार क्षमता तथा प्रयासों में वृद्धि होगी। छोटे भाई-बहनों के साथ संबंध बेहतर होंगे उनका सहयोग आपको मिलेगा। लेखन, मीडिया, शिक्षण, संचार तथा मार्केटिंग से जुड़े लोगों को विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। यदि आप लेखन संबंधी कार्य करते हैं तो समझ लीजिए आपकी लेखनी में धार लगने वाली है, आपकी रचनात्मकता में अप्रत्याशित निखार आएगा। नवम दृष्टि पंचम भाव पर होने से शिक्षा, संतान, बुद्धि, प्रेम संबंध तथा सृजनात्मक कार्यों में शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। विद्यार्थियों को सफलता मिलेगी तथा संतान पक्ष से सुखद समाचार प्राप्त हो सकते हैं। व्यापारियों के लिए यह गोचर विस्तार एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाला रहेगा। विदेशों से जुड़े कार्य, ऑनलाइन व्यापार, शिक्षा, प्रकाशन, धार्मिक सेवाएं, पर्यटन, आयुर्वेद, चिकित्सा तथा परामर्श क्षेत्र में विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। नए निवेशों में लाभ मिलने की संभावना रहेगी। भाग्य का सहयोग बढ़ने से रुके हुए भुगतान प्राप्त हो सकते हैं तथा आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे मजबूत होगी। हालांकि अति-आत्मविश्वास में बड़े वित्तीय निर्णय लेने से बचना चाहिए। जो पिता तुल्य लोग हैं उनका सहयोग आपको मिलेगा। इस समय यदि कोई विशेष अनुष्ठान आदि करना चाहते हैं तो आपकी वो इच्छा भी पूरी होगी। नवम में बैठे देवगुरु आपके भाग्य को जागृत करने वाले हैं। प्रेम संबंधों में सकारात्मकता बढ़ेगी। गुरु की नवम दृष्टि पंचम भाव पर होने से प्रेम संबंधों को स्थायित्व मिलने की संभावना बनेगी। परिवार की स्वीकृति मिलने के योग भी बन सकते हैं। विवाहित जातकों के लिए यह समय वैचारिक सामंजस्य बढ़ाने वाला रहेगा। जीवनसाथी के साथ धार्मिक यात्रा, तीर्थयात्रा अथवा किसी शुभ कार्य में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह गोचर अत्यंत अनुकूल रहेगा। प्रतियोगी परीक्षाएं, शोध कार्य, विधि शिक्षा, प्रशासनिक सेवाएं, अध्यापन तथा विदेश में अध्ययन की योजनाओं को विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। गुरु की कृपा से अध्ययन में एकाग्रता बढ़ेगी तथा योग्य मार्गदर्शन प्राप्त होगा। नवम भाव का संबंध पिता एवं गुरु से होता है। इस अवधि में पिता के साथ संबंधों में सुधार होगा तथा उनके माध्यम से लाभ मिलने की संभावना रहेगी। धर्म, अध्यात्म, मंत्र साधना, वेद-अध्ययन, ज्योतिष, योग तथा ध्यान में रुचि बढ़ सकती है। कई जातक इस अवधि में किसी योग्य गुरु के सान्निध्य में आ सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्यतः अच्छा रहेगा। मानसिक तनाव में कमी आएगी तथा सकारात्मक सोच विकसित होगी। हालांकि खानपान में असावधानी के कारण वजन बढ़ना, कफ संबंधी समस्याएं अथवा यकृत और पाचन से संबंधित छोटी-मोटी परेशानियां हो सकती हैं।
नियमित व्यायाम एवं संतुलित आहार लाभकारी रहेगा। इस गोचर काल में आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन आपके लिए लाभप्रद रहेगा। 2 जून से 17 जून तक जब देवगुरु पुनर्वसु में रहेंगे, भाग्य में सुधार के संकेत, पुराने कार्य बनेंगे तथा शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं।
18 जून से 18 अगस्त देवगुरु के पुष्य गोचर के समय किसी विशेष तीर्थयात्रा के लिए जा सकते हैं। यह आपके लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ समय होगा। पद, प्रतिष्ठा, भाग्योदय, शिक्षा, यात्रा एवं आर्थिक उन्नति के उत्कृष्ट योग बनेंगे।
वहीं 19 अगस्त से 31 अक्टूबर जब देवगुरु आश्लेषा नक्षत्र में होंगे। निर्णय लेते समय भावुकता से बचें। नए लोगों पर शीघ्र विश्वास न करें। देवगुरु के कर्क राशि में प्रवेश के पश्चात गुरुवार को अपने इष्टदेवता के मंदिर में जाकर उनका दर्शन कीजिए। गुरुजनों, आचार्यों एवं पिता तुल्य व्यक्तियों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लीजिए नहीं हैं तो उनके चित्र को प्रणाम कीजिए। श्रीमद्भगवद्गीता के बारहवें और पंद्रहवें अध्याय का पाठ कीजिए नहीं कर सकते तो दो चार श्लोक ही पढ़ें। वृश्चिक लग्न और वृश्चिक राशि वालों के लिए देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में उच्च होकर नवम भाव में गोचर वर्ष 2026 का सर्वाधिक शुभ और भाग्योदयकारी गोचर सिद्ध हो सकता है। धर्म, भाग्य, शिक्षा, करियर, सम्मान, गुरु कृपा, संतान सुख तथा आर्थिक स्थिरता के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिलेगी। यदि इस अवधि में प्राप्त अवसरों का सदुपयोग किया जाए तो जीवन की दिशा और दशा दोनों में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। धार्मिक कार्यों को करने से यह गोचर आपके लिए सर्वोत्तम फल देने वाला बन सकता है।


