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जानिए ये स्थान जहां पर आज भी चढ़ाई जाती है बलि, लेकिन कटती नहीं

भीलट देव, भानबाबा के मंदिर में आज भी निभाई जा रही वर्षों से चली आ रही परंपराएं

भैरूंदा। तहसील मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित भीलटदेव, भानबाबा के मंदिर में आज भी वर्षों से चली आ रही परंपराएं निभाई जा रही हैं। यहां पर लोग दर्शन करने के लिए आते हैं एवं अपनी मन्नत मांगते हैं और उनकी मन्नत जब पूरी हो जाती है तो वे यहां पर बलि चढ़ाने भी आते हैं, लेकिन अब मंदिर में सिर्फ बलि की पूजा होती है। यहां पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत बलि चढ़ाना बंद कर दिया है। यूं तो यहां पर वर्षभर लोग आते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा लोग वैसाख के माह में आते हैं और अपनी मन्नतें पूरी होने पर यहां पर पूजा-अर्चना करके बलि चढ़ाने की परंपरा को निभाते हैं।

दूर-दूर से आते हैं लोग –
भीलट देव, भानबाबा के दर्शन करने के लिए क्षेत्रवासियों के अलावा दूर-दूर से लोग आते हैं। वर्षभर यहां पर लोगों के आने का सिलसिला चलता रहता है, लेकिन वैसाख एवं चैत्र माह में सबसे ज्यादा लोग आते हैं। दरअसल यहां पर वर्षों पहले से परंपराएं चली आ रही हैं। पहले लोग यहां पर आकर अपनी मन्नते मांगते थे और फिर मन्नते पूरी होने के बाद मुर्गा, बकरा आदि की यहां पर बलि दी जाती थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा पशु बली को लेकर दिए गए निर्णय के बाद से यहां पर भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है एवं बलि की सिर्फ पूजा की जाती है, लेकिन यहां पर बलि देना पूरी तरह से बंद कर रखा है।

महिलाएं रखती हैं ढाई दिन का उपवास –
भैरूंदा से करीब तीन किलोमीटर दूर रूजनखेड़ी स्थित भीलट बाबा के दर्शन की जहां परपंराएं हैं तो वहीं यहां पर महिलाओं द्वारा भी ढाई दिन का उपवास रखकर उसे छोड़ने की परंपरा है। महिलाएं भीलट बाबा के नाम से ढाई दिन का उपवास रखती हैं। इस दौरान पूजा-पाठ करती हैं और फिर ढाई दिन का उपवास छोड़ने के लिए रूजनखेड़ी स्थित भीलट बाबा के मंदिर में पहुंचती है। यहां पर पूजा-अर्चना करने के बाद वे उपवास छोड़ती हैं। महिलाओं का मानना है कि ऐसा करने से उनके घरों में सुख-शांति बनी रहती है और भीलट बाबा उनके घर-परिवार को बाधाओं से बचाते हैं।

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