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अडंबर में न फंसे, सच्चे भाव से करें भक्ति: पं. प्रदीप मिश्रा

ऑनलाइन श्री कांवड़ शिव महापुराण का हुआ समापन

सीहोर। कुबेरेश्वरधाम से प्रसारित की जा रही पांच दिवसीय ऑनलाइन श्री कांवड़ शिव महापुराण कथा का शुक्रवार सुबह सादगीपूर्ण वातावरण में विराम हो गया। कथा के अंतिम दिन देशभर के लाखों श्रद्धालुओं ने घर बैठे सोशल मीडिया और टीवी चैनलों के माध्यम से शिव महापुराण कथा का पुण्य लाभ उठाया। कथा के समापन पर दूर-दराज से जुड़े श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
कथा के समापन अवसर पर कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के अडंबर और पाखंड में नहीं फंसना चाहिए। भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और वे सच्चे मन से की गई भक्ति से तुरंत प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि निंदा और विवाद से दूर रहकर निरंतर भगवान के नाम का जाप करना चाहिए। यदि मन में सच्ची आस्था है तो भक्ति में दिखावे की आवश्यकता नहीं होतीय केवल श्रद्धा से चढ़ाया गया एक लोटा जल भी जीवन को सार्थक कर देता है।
शिव और शक्ति का प्रतीक है कांवड़ यात्रा
पंडित प्रदीप मिश्रा ने सावन मास में निकल रही कांवड़ यात्राओं का महत्व बताते हुए कहा कि यह यात्रा शिव और शक्ति का अनुपम प्रतीक है, जो भक्त कांवड़ लेकर चल रहे हैं और जो लोग रास्ते में उनकी नि:स्वार्थ सेवा कर रहे हैं, वे दोनों ही परम पुण्य के भागीदार हैं। भगवान अपने भक्तों का भंडार हमेशा भरा रखते हैं। उन्होंने मार्ग में सेवा कार्य कर रहे सभी सामाजिक संगठनों और सेवादारों की जमकर सराहना की।
स्वामी विवेकानंद का प्रसंग देकर समझाया श्रेष्ठ धर्म
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस के बीच हुए संवाद का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र और धर्म में हम जन्म लेते हैंए उसके नियमों का पवित्र मन से पालन करना और समाज की सेवा करना ही मनुष्य का श्रेष्ठ धर्म है। दूसरों में कमियां निकालने के बजाय इंसान को अपने भीतर देखना चाहिए। जब हम किसी पर एक उंगली उठाते हैं तो बाकी तीन उंगलियां खुद हमारी ओर इशारा करती हैं।
सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक सेवा का महाकुंभ
भले ही ऑनलाइन कथा का विराम हो चुका है, लेकिन सावन के पवित्र महीने में सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार उमड़ रहा है। सीवन नदी के पवित्र जल से कांवड़ भरकर श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ का अभिषेक करने धाम पहुंच कांवडिय़ों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विठलेश सेवा समिति, जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा मार्ग में जगह-जगह नि:शुल्क भोजन प्रसादी, फलाहारी खिचड़ी, चाय और पेयजल की व्यवस्था की गई है। पूरा मार्ग हर-हर महादेव और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयकारों से गुंजायमान हो रहा है।

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