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नर्मदा किनारे बसे बुधनी के गांवों पर प्रशासन की नजर, बारिश में आफत से निपटने के लिए बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित

हर साल बारिश में अटक जाती हैं ग्रामीणों की सांसें, आपदा प्रबंधन के लिए कलेक्टर ने जारी किए निर्देश

सीहोर। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नर्मदा तटीय इलाकों के ग्रामीणों के लिए यह एक जरूरी और राहत भरी खबर है। दरअसल बुधनी विधानसभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा और यहां के दर्जनों गांव सीधे मां नर्मदा के किनारे बसे हुए हैं। हर साल मानसून के दस्तक देते ही और तवा व बारना डैम के गेट खुलने के बाद इन गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। निचली बस्तियों और तटीय गांवों में पानी भरने के कारण हर साल बारिश के दिनों में ग्रामीणों की सांसें अटकी रहती हैं।
ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन अभी से अलर्ट मोड पर आ गया है। अतिवृष्टि (भारी बारिश) और बाढ़ की किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देश पर कलेक्ट्रेट कार्यालय में एक हाईटेक बाढ़ नियंत्रण एवं आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है।
15 जून से शुरू होगा पहरा, 24 घंटे तैनात रहेंगे कर्मचारी
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट के कक्ष क्रमांक 138 में बनाए गए इस कंट्रोल रूम को आगामी वर्षाकालीन अवधि यानी 15 जून से 15 अक्टूबर तक के लिए स्थापित किया गया है। यह कंट्रोल रूम दिन-रात यानी 24 घंटे लगातार सक्रिय रहेगा, ताकि बुधनी सहित जिले भर के किसी भी कोने से बाढ़ या जलभराव की सूचना मिलने पर तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा सके। कलेक्टर बालागुरू के. ने कंट्रोल रूम के सुचारू संचालन के लिए तीन शिफ्टों में अधिकारियों और कर्मचारियों की बकायदा ड्यूटी लगा दी है। किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
इस नंबर पर दें बाढ़ या जलभराव की सूचना
प्रशासन ने बुधनी क्षेत्र सहित पूरे जिले के नागरिकों और विशेषकर नर्मदा किनारे बसे ग्रामीणों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर: 07562-226470 है।
यदि बारिश के दौरान नदी.नाले उफान पर आते हैं, गांवों में पानी घुसता है या किसी भी तरह की आपदा की स्थिति बनती है तो ग्रामीण तुरंत इस नंबर पर कॉल करके प्रशासन से मदद मांग सकते हैं। इसके अलावा आपदा प्रबंधन टीम को भी लाइफ जैकेट, बोट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

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