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रामाखेड़ी में आग का तांडव, 15 एकड़ गेहूं की फसल खाक, बीमा नियमों पर भडक़े किसान

सीहोर। इछावर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रामखेड़ी में अज्ञात कारणों से लगी भीषण आग ने किसानों के साल भर के सपनों को जलाकर राख कर दिया। इस अग्निकांड में करीब 15 एकड़ क्षेत्र में खड़ी गेहूं की सुनहरी फसल देखते ही देखते काली राख में बदल गई। घटना से आक्रोशित और दुखी किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में जले हुए खेतों में खड़े होकर सरकार और बीमा कंपनियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
किसानों के अनुसार आगजनी की इस घटना में आधा दर्जन से अधिक किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पीडि़तों में प्रमुख रूप से कुबेर सिंह मेवाड़ा 3.30 एकड़, दिलीप सिंह 3.30 एकड़, गोपाल सिंह 2 एकड़, बाबूलाल 2 एकड़, धर्मेंद्र एक एकड़ और अरविंद मेवाड़ा की एक एकड़ फसल शामिल हैं। इन सभी किसानों की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।
बीमा कटता है पर मिलता नहीं
किसानों के अनुसार जब उन्होंने कृषि अधिकारी श्री देवड़ा से चर्चा की तो उन्हें बताया गया कि आगजनी से हुए नुकसान पर फसल बीमा देने का कोई नियम नहीं है, केवल तहसील से आरबीसी 6.4 के तहत राहत राशि मिल सकती है। इस पर किसानों ने सवाल उठाया कि जब बैंक हर साल उनके खातों से बीमा राशि ऑटोमेटिक काट लेती है तो प्राकृतिक आपदा की तरह आगजनी को बीमा के दायरे में क्यों नहीं रखा जाता।
राहत राशि बनाम नुकसान
समाजसेवी एमएस मेवाड़ा और पीडि़त किसानों ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। किसानों का कहना है कि एक एकड़ में करीब 30 क्विंटल गेहूं निकलता है, जिसकी कीमत लगभग 70 हजार रुपये होती है। तहसील से मिलने वाली राहत राशि मात्र 12 हजार रुपये प्रति एकड़ के आसपास बैठती है। किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि आगजनी को भी बीमा कवर में शामिल किया जाए ताकि किसानों को वास्तविक नुकसान की भरपाई मिल सके।
बिजली विभाग की लापरवाही पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि कई बार बिजली के झूलते तारों और ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगती है। यह सीधे तौर पर विद्युत मंडल की लापरवाही है। किसानों ने मांग की कि बिजली विभाग के कारण होने वाले नुकसान पर भी आरबीसी 6.4 के तहत तत्काल और उचित मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि बीमा नियमों में बदलाव कर उन्हें हक नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।

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