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बारिश से पहले एक्शन में नपा, जर्जर मकान जमींदोज, हादसों को रोकने के लिए चलाया अभियान

सीहोर। आगामी मानसून सीजन को देखते हुए सीहोर नगर पालिका जनसुरक्षा के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। बारिश के दौरान जर्जर मकानों के गिरने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए नगर पालिका अमले ने शहर में चिन्हित किए गए खतरनाक जर्जर भवनों को जमींदोज करने का अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में नपा की टीम ने जेसीबी की मदद से जर्जर निर्माणों को ढहा दिया।
बता ेदं नगर पालिका की इस कार्रवाई के पीछे बीते वर्ष हुआ दर्दनाक हादसा है। नपा के प्रभारी राजस्व अधिकारी संजय शुक्ला ने बताया कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुधीर सिंह के निर्देश पर यह मुहिम चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व में नगर के चरखा लाइन क्षेत्र में एक जर्जर मकान ढहने के कारण एक बुजुर्ग महिला की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। शहर में दोबारा ऐसी कोई अप्रिय घटना या जनहानि न हो, इसलिए तकनीकी निरीक्षण के बाद अत्यधिक खतरनाक घोषित हो चुके मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
नोटिस के बाद भी नहीं चेते मालिक, तो चला बुलडोजर
राजस्व प्रभारी श्री शुक्ला के अनुसार जिन मकानों की स्थिति बेहद कमजोर और खतरनाक थी, उनके मालिकों को नगर पालिका द्वारा पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें खुद ही मकान हटाने या आवश्यक मरम्मत कराने की समय-सीमा दी गई थी। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब भवन मालिकों द्वारा सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए, तब नगर पालिका की टीम को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
कार्रवाई के दौरान मौके पर नगर पालिका के सहायक यंत्री विजय कोली, वैभव लोवनिया और अतिक्रमण प्रभारी तिलक वर्मा सहित भारी संख्या में नपा का अमला और पुलिस बल मौजूद रहा। अधिकारियों ने मौके पर ही अन्य भवन स्वामियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की अंतिम चेतावनी भी दी।
नगर पालिका की नागरिकों से अपील
नगर पालिका प्रशासन ने शहर के नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास या मोहल्ले में कोई भी भवन बेहद जर्जर या खतरनाक अवस्था में दिख रहा है तो उसकी सूचना तुरंत नगर पालिका को दें। इसके साथ ही पुराने मकानों के मालिकों से कहा गया है कि वे बरसात शुरू होने से पहले अपने घरों की अच्छी तरह मरम्मत करा लें, ताकि किसी भी हादसे से बचा जा सके।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.