
सीहोर। पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर तीर्थ श्री नेमिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर किला आष्टा में धर्म और आराधना का माहौल बना हुआ है। मंदिर के उपाश्रय में पंन्यास प्रवर यशोजित विजय महाराज साहब ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए पर्युषण पर्व की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं है, बल्कि स्वयं के भीतर झांककर आत्मशुद्धि करने, अपने दोषों को पहचानने और जीवन को सदाचार की ओर ले जाने का अवसर है।
महाराज साहब ने कहा कि मनुष्य को किसी के प्रति भी बैर, द्वेष और ईष्र्या का भाव नहीं रखना चाहिए। हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि दुनिया या परिवार के अन्य लोग क्या कर रहे हैं, बल्कि व्यक्ति को स्वयं से प्रश्न करना चाहिए कि मुझे क्या करना है और मेरा जीवन किस दिशा में जाना चाहिए, यदि व्यक्ति स्वयं को सुधारने का प्रयास करे तो उसका जीवन भी सुधरेगा और परिवार तथा समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि आचरण में इतनी शुद्धता होनी चाहिए कि रोम-रोम में पवित्रता का भाव दिखाई दे।
भारतीय संस्कृति और आत्म कल्याण का मार्ग
पंन्यास प्रवर ने कहा कि भारत संस्कृति प्रधान देश है। हमारी संस्कृति हमें सत्य, अहिंसा, संयम, त्याग, तपस्या और सदाचार का मार्ग दिखाती है। इसलिए हमारा जीवन भी इन्हीं संस्कारों से ओत प्रोत होना चाहिए। संसार में रहते हुए भी व्यक्ति पुण्यार्जक श्रावक का जीवन जी सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि वह अपने दैनिक जीवन में धर्म के सिद्धांतों को उतारे और अपने कर्मों के प्रति सजग रहे।
आत्मा का सम्मान ही धर्म की मूल भावना
गर्भपात के विषय में श्रद्धालुओं को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन अत्यंत मूल्यवान है। किसी भी जीव के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। प्रत्येक जीव में आत्मा का अस्तित्व है और आत्मा का सम्मान करना ही धर्म की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि संसार के बाहरी साधनों में स्थायी सुख नहीं है। मनुष्य पूरी दुनिया में सुख तलाशता है, लेकिन वास्तविक सुख अपनी आत्मा में ही विद्यमान है। आत्मा के अतिरिक्त कहीं भी स्थायी सुख नहीं है।
रजत पालकी में निकला पौथाजी का जुलूस
पर्युषण पर्व के अंतर्गत तीर्थ श्री नेमिनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर किला से भगवान को रजत पालकी में विराजमान कर पंन्यास प्रवर यशोजित विजय महाराज साहब ससंघ के पावन सानिध्य में पौथाजी का भव्य जुलूस निकाला गया। श्रद्धालु भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ जुलूस में शामिल हुए। जुलूस प्रगति गली, बुधवारा, गल चौराहा होते हुए कॉलोनी चौराहा पहुंचा। यहां से जुलूस श्री सीमंधर जिनदत्त धाम दादाबाड़ी पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं ने दादा गुरु के दर्शन कर धर्मलाभ लिया। इसके बाद जुलूस अदालत तिराहा, मानस भवन रोड और सुभाष चौक होते हुए गंज स्थित श्री जैन मंदिर पहुंचा।