श्री हनुमान मंदिर में हुई प्राण-प्रतिष्ठा, कल होगा विशाल भंडारा

सीहोर। शहर के हृदय स्थल बस स्टैंड स्थित श्री हनुमान मंदिर में आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ एवं प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवें दिन शुक्रवार को पूर्ण विधि विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देव प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस अवसर पर पूरा वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
यज्ञ संचालक श्री श्री 108 पंडित दुर्गा प्रसाद कटारे बाबा के मार्गदर्शन में सुबह दिव्य अनुष्ठान और मंगलाचरण किया गया। प्राण प्रतिष्ठा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित कटारे ने कहा किए हिंदू धर्म में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है। इसके बिना मूर्ति पूजा अधूरी है। मंत्रोच्चार के माध्यम से निर्जीव मूर्ति में दिव्य जीवन शक्ति का संचार किया जाता है, जिससे पाषाण प्रतिमा साक्षात ईश्वर का साकार रूप ले लेती है।

शनिवार को महाभंडारा
मंदिर समिति के अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर ने बताया कि विगत छह दिनों से जारी इस महोत्सव में जन सहयोग की अनूठी मिसाल देखने को मिली है। रात्रि में आयोजित नगर भोज में अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण कर चुके हैं। शनिवार को महाआरती के पश्चात दोपहर में भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके साथ ही शनिवार को हवन, पूर्णाहुति, विदाई और मानस एवं संत सम्मेलन का भी आयोजन होगा।
जनसहयोग से निखरा मंदिर का स्वरूप
बता दें बस स्टैंड स्थित इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोंद्धार लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह भव्य मंदिर क्षेत्रवासियों के सहयोग से निर्मित हुआ है। समिति ने निर्णय लिया है कि यहां भविष्य में भी नियमित रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर जारी रहेगा। वर्तमान में श्रीराम कथा के साथ-साथ उज्जैन के महाकाल मंडल द्वारा रामलीला का मंचन भी किया जा रहा है।

माता-पिता की आज्ञा मानने वाला ही धन्य
महोत्सव के दौरान कथा व्यास डॉ. प्रज्ञा भारती ने भगवान श्रीराम के जन्म और वनवास प्रसंग का मर्मस्पर्शी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जगत में उसी का जन्म सार्थक है जिसे माता-पिता के वचन प्राणों से प्रिय हैं। राम वन गमन के समय माता कौशल्या की पीड़ा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि पुत्र के प्रति मां का प्रेम ही हृदय का विराट तत्व है। इस कथा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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