कुबेरेश्वर धाम पर श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी राधाष्टमी

सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित कुबेरेश्वर धाम में शनिवार को राधाष्टमी का पावन पर्व आस्था, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर दोपहर 12 बजे अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा। राधाष्टमी को लेकर धाम में विशेष तैयारियां की गई हैं। भगवान की प्रतिमाओं का चांदी एवं सोने से निर्मित पोशाकों से विशेष श्रृंगार किया गया है। राधाष्टमी के अवसर पर सुबह से ही धाम में भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। भगवान को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विठलेश सेवा समिति की ओर से नि:शुल्क भोजन प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। महाआरती के बाद शाम 4 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का क्रम प्रारंभ होगा।
हजारों श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी –
राधाष्टमी की तैयारियों के बीच शुक्रवार को भी कुबेरेश्वर धाम में सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। धाम में आने वाले भक्तों के लिए विठलेश सेवा समिति की ओर से भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला, कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा सहित अन्य सेवादार व्यवस्थाओं में जुटे रहे। धाम में दिनभर भजन-कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों के कारण भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रसादी ग्रहण की।
मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान धन नहीं, चरित्र है –
अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को चरित्र और सदाचार का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान कहते हैं कि मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान उसका धन नहीं, बल्कि उसका चरित्र है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने चरित्र की रक्षा करता है तो ईश्वर की कृपा उसके जीवन में बनी रहती है और जीवन में आने वाले कष्टों का निवारण भी होता रहता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में सदाचार, संयम और अच्छे आचरण को अपनाने का संदेश दिया।
मुरली मनोहर मंदिर में तीन युगों की झलक –
कुबेरेश्वर धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धाम परिसर में निर्मित मुरली मनोहर मंदिर में श्रद्धालुओं को धार्मिक परंपरा और विभिन्न युगों से जुड़ी आस्था की झलक देखने को मिलती है। मंदिर में भगवान शिव-माता पार्वती, भगवान राम-माता सीता और भगवान कृष्ण-राधा की प्रतिमाएं विराजमान हैं। धाम में आने वाले शिवभक्त भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। राधाष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को पंडित प्रदीप मिश्रा सहित समिति के पदाधिकारियों और सेवकों द्वारा भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया।
दोपहर 12 बजे महाआरती और शाम चार बजे से दर्शन का क्रम –
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शनिवार को राधाष्टमी के अवसर पर सुबह भगवान को विधि-विधान से 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। इसके उपरांत दोपहर 12 बजे महाआरती होगी। महाआरती के बाद शाम 4 बजे से श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। उन्होंने बताया कि राधाष्टमी महोत्सव के दौरान ढोल-बाजों और भव्य आतिशबाजी के साथ उत्सव मनाया जाएगा। आयोजन को लेकर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। धाम में राधाष्टमी के पर्व को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह बना हुआ है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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