एनजीटी के बैन के बाद भी नर्मदा से बेखौफ निकल रही रेत, 2.43 करोड़ का जुर्माना ठोकने के बाद भी नहीं थम रहा अवैध खनन

सीहोर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रतिबंध के बावजूद जिले में नर्मदा नदी से अवैध रेत खनन का काला कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिला खनिज विभाग द्वारा आंकड़ों में करोड़ों रुपये की पेनल्टी और दर्जनों मशीनें जब्त करने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नदी का सीना चीरकर पोकलेन, नावों और पनडुब्बियों के जरिए धड़ल्ले से रेत निकाली जा रही है।
जिला खनिज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 173 गौण खनिज खदानें स्वीकृत हैं, जिनमें 28 रेत की खदानें शामिल हैं। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 से लेकर अब तक अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के कुल 389 मामले दर्ज किए हैं। इन कार्रवाइयों के तहत खनिज माफिया से 2 करोड़ 43 लाख 80 हजार 597 रुपये का अर्थदंड भी वसूला गया है।
जब्त की गईं गाडिय़ां और भारी मशीनें
ट्रैक्टर-ट्रॉली: 212
डंपर: 123
पोकलेन मशीनें: 26
जेसीबी व लोडर: 31
नाव इंजन व पनडुब्बियां: 12

वर्षवार दर्ज प्रकरणों की स्थिति
वित्तीय वर्ष 2024-25: इस दौरान कुल 374 प्रकरण दर्ज कर 2.30 करोड़ रुपये से अधिक का अर्थदंड वसूला गया। इसमें अवैध परिवहन के 290 मामले 1.58 करोड़ रुपए जुर्माना, अवैध उत्खनन के 53 मामले 52.19 लाख जुर्माना और अवैध भंडारण के 31 मामले 18.98 लाख जुर्माना शामिल थे।
वित्तीय वर्ष 2025-26 चालू वर्ष: अब तक अवैध उत्खनन और परिवहन के 15 प्रकरण दर्ज कर 13.71 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला जा चुका है।
नर्मदा के अस्तित्व और पर्यावरण पर गहराता संकट
लगातार भारी-भरकम मशीनों और पनडुब्बियों के इस्तेमाल से नर्मदा नदी के प्राकृतिक स्वरूप, जल प्रवाह और तटीय पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल गाडय़िां जब्त करने और जुर्माना वसूलने से यह नेटवर्क खत्म नहीं होगा। जब तक अवैध उत्खनन के मुख्य आकाओं और पूरे गिरोह पर सीधी नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक नर्मदा नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता रहेगा।
जिला खनिज अधिकारी राजकुमार बराठे के अनुसर विभाग द्वारा समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ मुहिम चलाकर कार्रवाई की जाती है। हालांकि विभागीय दावों के बावजूद रेत माफिया के हौसले पस्त न होना प्रशासन की निगरानी प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

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