फिर क्लोरीन गैस का रिसाव, दहशत में कटी ग्रामीणों की रात, अलर्ट पर रहा जिला अस्पताल का अमला

सीहोर। काहिरी स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में लगातार बरती जा रही लापरवाही के कारण ग्रामीणों की पूरी रात दहशत में कटी। 48 घंटे के भीतर दूसरी बार हुए क्लोरीन गैस रिसाव से हालात इतने बिगड़ गए कि एक तरफ ग्रामीण अपने घरों को छोडक़र सुरक्षित ठिकानों की ओर भागे, वहीं दूसरी तरफ बिगड़ती स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल के स्वास्थ्य अमले को पूरी रात अलर्ट मोड पर रखा गया।
गैस के संपर्क में आने से ग्रामीणों को सांस लेने में भारी तकलीफ और आंखों में तेज जलन होने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला अस्पताल के

आपातकालीन कक्ष में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ अलर्ट पर रहा। चिकित्सक डॉ. हरिओम गुप्ता के अनुसार लसुडिय़ा खास से प्रेमजी, अनमोल, रामसभा, केसर सिंह और प्रेम सिंह सहित 10 लोगों को तत्काल अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। इनमें से एक मरीज की हालत नाजुक बताई जा रही हैए जिसे लगातार मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।

निष्क्रिय करने की लापरवाही बनी वजह
मंगलवार शाम हुए रिसाव के बाद गुरुवार को नगरपालिका की टीम प्लांट में रखे पुराने सिलेंडरों को खाली और निष्प्रभावी (न्यूट्रलाइज) करने पहुंची थी। भरे हुए सिलेंडर की तकनीकी न्यूट्रलाइजेशन प्रक्रिया के दौरान वाल्व से अचानक फिर से लीकेज शुरू हो गया। देखते ही देखते हवा में तीखी गंध फैल गई, जिससे गांव में भगदड़ मच गई।

पेड़-पौधे झुलसे, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
गैस का प्रभाव इतना खतरनाक था कि प्लांट परिसर के आसपास लगे पेड़-पौधे तक झुलस गए। बार-बार हो रहे हादसों से गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन क्लोरीन जैसी घातक गैस के रख-रखाव में तकनीकी विशेषज्ञों के बजाय अप्रशिक्षित कर्मचारियों का सहारा ले रहा है।
नागदा से बुलाई गई स्पेशल टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने नागदा से ग्रासिम कंपनी की विशेषज्ञ टेक्निकल टीम को बुलाया। नगरपालिका सीएमओ सुधीर सिंह और इंजीनियर विजय कोली के अनुसार विशेषज्ञों की सख्त निगरानी में तीनों क्लोरीन सिलेंडरों को ट्रक में लोड कर प्लांट से बाहर सुरक्षित स्थान पर भिजवाया गया। हालांकि नगर पालिका प्रशासन का दावा है कि लीकेज पूरी तरह बंद कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।

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