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देवरिया: सपा ने पुराने दिग्‍गजों पर लगाया दांव, ब्रह्माशंकर पथरदेवा लौटे, गजाला लारी 5वीं बार लड़ेंगी चुनाव

देवरिया
सपा ने देवरिया के पथरदेवा से पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, रामपुर कारखाना से गजाला लारी व भाटपाररानी से विधायक डॉ आशुतोष उपाध्याय को प्रत्याशी घोषित किया है। तीनों ही दल के पुराने नेता है तथा राजनीतिक हलकों में इनका प्रत्याशी बनना तय माना जा रहा था। फिर भी राजनीतिक के जानकारों की माने तो सबसे पहले इन तीन विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की घोषणा कर पार्टी ने जिले में दल के समीकरणों को दुरूस्त करने की कोशिश की है। पथरदेवा से प्रत्याशी बनाए गए ब्रह्माशंकर त्रिपाठी व आशुतोष उपाध्याय की सपा में रहने के बाद अलग पहचान है। इन दोनों नेताओं की सपा के वोट बैंक से इतर अपना खुद का समर्थक वर्ग है तथा अपनी जाति में भी अच्छी पहचान है। पूर्व विधायक गजाला लारी की भी राजनीति का अलग अंदाज है। पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र जिले का सबसे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है। इसके अलावा यहां सैथवार, कुर्मी, ब्राह्मण मतदाताओं की अच्छी तादाद है। इसी तरह भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्र कुशवाहा बहुल माना जाता है। यहां ब्राह्मण, यादव, क्षत्रिय वर्ग के साथ ही अल्पसंख्यक मतदाताओं की अच्छी संख्या है। रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अच्छी है। इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक वर्ग के साथ ही यादव, क्षत्रिय व अन्य पिछड़े वर्ग की भी अच्छी संख्या है। आशुतोष उपाध्याय व गजाला लारी 2017 के चुनाव में भी सपा प्रत्याशी थे, लेकिन पथरदेवा से शाकिर अली चुनाव लड़े थे। उनके निधन के बाद श्री अली पुत्र भी पथरदेवा से टिकट के दावेदार थे, पर पार्टी ने श्री त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया है। जानकारों की माने तो श्री त्रिपाठी को एक बार फिर जिले में लाकर व आशुतोष को प्रत्याशी बनाकर सपा ने जहां ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने की कोशिश की है, वहीं गजाला लारी के जरिए अल्पसंख्यकों को साधने का दांव चला है।

पथरदेवा : पुराने क्षेत्र में फिर से लौटे ब्रह्माशंकर
पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र से घोषित सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी एक तरह से अपने पुराने क्षेत्र में लौटे हैं। छात्र जीवन से ही राजनीति शुरू करने वाले ब्रह्माशंकर त्रिपाठी कसया के ब्लॉक प्रमुख रहे। कभी देवरिया में रही कसया विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने निर्दल प्रत्याशी के रूप में पहला चुनाव लड़ा था। ब्रह्माशंकर त्रिपाठी ने पहले ही चुनाव में अपनी छाप छोड़ी और बहुत कम मतों से भाजपा प्रत्याशी सूर्यप्रताप शाही से पराजित हुए। 1989 का चुनाव जनता दल के टिकट पर लड़े और पहली बार विधायक बने। 1991 में फिर जनता दल से चुनाव लड़े, लेकिन पराजित हो गए। 1993 में जनता दल से विधायक बने और बाद में सपा में शामिल हो गए। 13 मई 1994 को कुशीनगर जिले का गठन हुआ, लेकिन कसया विधानसभा क्षेत्र देवरिया में ही रहा तथा कुशीनगर जिले का हिस्सा इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल रहा। 1996 का चुनाव हार गए। 2002 में सपा के टिकट में जीत हासिल की तथा पहली बार कैबिनेट मंत्री बने। 2007 में भी जीते। 2012 में कसया विधानसभा समाप्त हो गई। उसकी जगह जिले में पथरदेवा अस्तित्व में आई तो श्री त्रिपाठी कुशीनगर से विधानसभा चुनाव लड़े और जीत कर सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। 2017 में कुशीनगर से हार गए। देवरिया सदर के विधायक जनमेजय सिंह के निधन के बाद 2020 में हुए उपचुनाव में लड़े लेकिन हार गए। श्री त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर मै पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र में घूम रहा था। पार्टी ने मुझे पथरदेवा से प्रत्याशी घोषित कर सम्मान बढ़ाया है। जनता के सहयोग से पथरदेवा के विकास की पुरानी लड़ाई शुरू होगी।

भाटपाररानी : आशुतोष उपाध्याय के लिए हैट्रिक लगाने का मौका

इस समय जिले के सबसे कम उम्र के विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय लगातार तीसरी बार भाटपाररानी से सपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। गुरुवार को पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित किया। अपने पिता स्व कामेश्वर उपाध्याय की देखरेख में राजनीति ककहरा सीखने वाले आशुतोष उपाध्याय पहली बार 2013 में विधायक बने। पिता कामेश्वर उपाध्याय का निधन होने के बाद 2013 में हुए उपचुनाव में उन्हें प्रत्याशी बनाया और उन्होंने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की। 2017 के चुनाव में सपा ने उन्हें फिर प्रत्याशी बनाया। आशुतोष ने दल के भरोसे को कायम रखा और जीत हासिल की। जिले में केवल भाटपाररानी में ही सपा को जीत मिली थी। भाटपाररानी ही एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां अभी तक भाजपा को सफलता नहीं मिली है। डॉ आशुतोष उपाध्याय ने कहा कि क्षेत्र के साथ ही प्रदेश की जनता भाजपा सरकार से परेशान है। इस चुनाव में सपा जनता के साथ है तथा पिछले चुनाव से अधिक मतों से जीतूंगा।

रामपुर कारखाना : गजाला पांचवीं बार लड़ेंगी चुनाव
रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी घोषित की गयी पूर्व विधायक गजाला लारी का यह पांचवा विधानसभा चुनाव होगा। गजाला लारी के पति मुराद लारी बहुजन समाज पार्टी से राजनीति करते थे तथा मायावती के काफी करीबी रहे। 1996 में वह सलेमपुर से विधायक चुने गए, लेकिन विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के कुछ महीने पूर्व उनका असामयिक निधन हो गया। 2002 में हुए विधानसभा के चुनाव में बसपा ने मुराद लारी की पत्नी गजाला लारी को प्रत्याशी बनाया। गजाला की राजनीतिक पारी यहीं से शुरू हुई। श्रीमती लारी पहले ही चुनाव में विधायक बनी, लेकिन बाद में बसपा से मतभेद के चलते वह सपा में चली तथा 2007 का चुनाव सलेमपुर से ही समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ी व दूसरी बार विधायक चुनी गयी। 2012 में हुए परिसीमीन में सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया और श्रीमती लारी रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ी और लगातार तीसरी बार विधायक बनी। 2017 रामपुर से ही फिर सपा प्रत्याशी बनी, लेकिन उन्हें भाजपा प्रत्याशी कमलेश शुक्ल से पराजित होना पड़ा। पार्टी ने एक बार फिर गजाला पर भरोसा जताते हुए लगातार तीसरी बार अपना प्रत्याशी बनाया है। प्रत्याशी घोषित होने के बाद श्री लारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति आभार जताते हुए कहा कि दल ने मुझे प्रत्याशी बनाकर सम्मान दिया है। मुझे विश्वास है कि क्षेत्र की जनता के सहयोग से भाजपा को भारी मतों से पराजित कर प्रदेश में सपा की सरकार व राष्ट्रीय अध्यक्ष को मुख्यमंत्री बनाने में अपना योगदान दूंगी।

 

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