किसानों के भारी विरोध के बाद झुका कृषि विभाग, ई-विकास 2.0 लागू, 21 दिन में 3 बार बदले नियम

अब न 50 शब्दों का कारण लिखना होगा, न टोकन के लिए घंटों भटकना होगा

सीहोर। किसानों के लिए खाद खरीदने की व्यवस्था एक बार फिर बदल गई है। पिछले 21 दिनों के भीतर कृषि विभाग ने आदेशों में तीन बार फेरबदल करते हुए प्रदेशभर में ई-विकास 2.0 वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान प्रणाली लागू कर दी है। 29 जुलाई को किसानों के उग्र प्रदर्शन और विरोध के बाद ई-टोकन की अनिवार्यता खत्म कर हाइब्रिड मोड लागू किया गया था, लेकिन अब विभाग ने पुरानी कमियों और जटिलताओं को दूर करते हुए नए पोर्टल के साथ फिर से ई-टोकन व्यवस्था अनिवार्य कर दी है।
कृषि सचिव निशांत वरवड़े द्वारा जारी नए आदेश के तहत प्रदेशभर में इस नई व्यवस्था से खाद वितरण शुरू हो चुका है। विभाग का दावा है कि ई-विकास 2.0 पोर्टल को किसानों के सुझावों के आधार पर पूरी तरह री.डिजाइन किया गया है, ताकि खाद वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुलभ और त्वरित हो सके।
21 दिन में यूं बदला खाद बिक्री का ढर्रा
1 अप्रैल: प्रदेशभर में ई.विकास प्रणाली के तहत फार्मर आईडी और ऐप के जरिए ई.टोकन से खाद देना अनिवार्य किया गया।
29 जुलाई: किसानों के विरोध और तकनीकी दिक्कतों के बाद ई.टोकन की अनिवार्यता खत्म कर हाइब्रिड मोड (थंब इम्प्रेशन व टोकन दोनों) शुरू हुआ।
14 अगस्त: पोर्टल अपडेशन और तकनीकी सुधारों के नाम पर खाद की बिक्री पूरी तरह रोक दी गई।
19 अगस्त: व्यापारियों, समितियों और किसानों के सुझावों के बाद नया ई.विकास 2.0 पोर्टल लॉन्च कर ई.टोकन व्यवस्था फिर अनिवार्य की गई।
किसानों को मिली कई बड़ी राहतें
नए पोर्टल पर प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है। पहले अनुशंसित मात्रा से अधिक खाद मांगने पर किसानों को पोर्टल पर 50 शब्दों में लिखित कारण दर्ज करना पड़ता था, जिससे अशिक्षित किसानों को काफी परेशानी होती थी। अब इस अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है और किसान केवल ड्रॉप-डाउन मेन्यू से कारण चुनकर अतिरिक्त खाद की बुकिंग कर सकेंगे। इसके अलावा मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर भीड़ नियंत्रण के लिए रोजाना 200 से अधिक टोकन जनरेट करने की सुविधा दी गई है।
ई.विकास 2.0 में क्या-क्या बदला
जरूरत के हिसाब से एक खाद चुनने की छूट: किसान पोर्टल पर उपलब्ध किसी भी एक विशिष्ट उर्वरक जैसे सिर्फ यूरिया या डीएपी का चयन कर सकते हैं।
प्रति हेक्टेयर बैग से गणना: खाद का आवंटन अब प्रति हेक्टेयर बैग के आधार पर तय होगा।
टोकन कैंसिल करने का विकल्प: टोकन जनरेट होने के 24 घंटे के भीतर उसे निरस्त या अपडेट करने की सुविधा भी शुरू की गई है।
फसल खराब होने पर विशेष सुविधा: आपदा या बीमारी से फसल नष्ट होने पर एक्सेप्शनल हैंडलिंग के तहत तहसीलदार या एसडीएम 48 घंटे के भीतर पुन: खाद मांग को मंजूरी देंगे।
जिले में खाद का गणित
खरीफ 2026 में कुल मांग: 1,06,000 मीट्रिक टन
अब तक वितरित खाद: 45,632 मीट्रिक टन
वर्तमान में उपलब्ध स्टॉक: 22,751 मीट्रिक टन
पिछले साल 2025 कुल वितरण: 1,12,804 मीट्रिक टन

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