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बच्चियों की सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी, पॉक्सो एक्ट पर कार्यशाला में अधिकारियों ने लिया संकल्प

सीहोर। महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने तथा समाज में सुरक्षा और संवेदनशीलता का माहौल बनाने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के दिशा-निर्देशों के पालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर द्वारा स्थानीय जिला पुलिस और एनजीओ युवा विकास मंडल के संयुक्त तत्वावधान में जिला पंचायत सभागार में जागृति योजना के अंतर्गत पॉक्सो अधिनियम के संवेदीकरण हेतु एक दिवसीय स्टेकहोल्डर वर्कशॉप आयोजित की गई। इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियोंए कर्मचारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने बढ़-चढक़र भाग लिया और बच्चियों की सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व न्यायाधीश स्वप्नश्री सिंह, जिला पंचायत सीईओ सृजना यादव तथा महिला सुरक्षा शाखा की उप पुलिस अधीक्षक पूजा शर्मा द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
सुरक्षित वातावरण पाना हर बच्चे का अधिकार
कार्यशाला के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए न्यायाधीश स्वप्नश्री सिंह ने पॉक्सो अधिनियम और बच्चों के कानूनी अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने दोक टूक शब्दों में कहा कि हर बच्चा एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण पाने का अधिकार रखता है। इसके साथ ही उन्होंने आम जनता और पीडि़तों के लिए तहसील न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक उपलब्ध निशुल्क विधिक सहायता एवं सलाह के बारे में कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। सत्र के अंत में उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए कानूनी सवालों के बेहद सरल ढंग से जवाब भी दिए।
सभी विभागों में मजबूत समन्वय की जरूरत
युवा विकास मंडल संस्था के सीईओ राजेंद्र सिंह मेवाड़ा ने कार्यशाला के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों के संरक्षण के लिए केवल कानून काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी विभागों के बीच मजबूत समन्वय और संवेदनशील सोच की अत्यंत आवश्यकता है। जब सभी संबंधित विभाग एक मंच पर आकर जिम्मेदारी से काम करेंगे, तभी एक सुरक्षित समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।
वहीं जिला पंचायत सीईओ सृजना यादव ने ग्रामीण और जिला स्तर पर विभागीय सहयोग की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का सही और समय पर लाभ जरूरतमंद बच्चियों और महिलाओं तक पहुंचाना ही प्रशासनिक स्तर पर हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी हुआ मंथन
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में महिला सुरक्षा शाखा की डीएसपी पूजा शर्मा ने बच्चियों से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा अपनाई जाने वाली रेस्क्यू और कानूनी प्रक्रिया को बेहद सरल भाषा में समझाया। इसके बाद साइबर सेल के सुशील कुमार साल्वे ने वर्तमान दौर में बढ़ते साइबर अपराधों, सोशल मीडिया के खतरों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी, जबकि विशेषज्ञ एजाज खान ने पीडि़त बच्चों और समाज के मानसिक स्वास्थ्य व संवेदनशीलता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर सत्र लिया। इस कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ समाजसेवियों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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