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रोक के बावजूद भी खुलेआम नर्मदा नदी में मारी जा रही मछली, व्हीआईपी गाड़ियों से हो रही सप्लाई

नर्मदा नदी में दिनभर चलता है मछली पकड़ने का काम, अधिकारियोें को नहीं है चिंता

सुमित शर्मा, सीहोर।
(9425665690)

नर्मदा नदी से अवैध रेत का खनन तो लगातार किया जा रहा है, लेकिन यहां से अवैध रूप से मछलियां पकड़ने का काम भी जोेरों पर है। सरकारी नियमों के तहत 16 जून से 15 अगस्त तक मछली मारनेे, पकड़ने और उन्हें बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है, लेकिन यह प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। नियमों को ठेंगा दिखातेे हुए अवैध मछली कारोबारी नर्मदा नदी सहित अन्य नदियों से खुलेआम मछलियां पकड़ रहे हैं और धड़ल्ले से इनकी सप्लाई का काम किया जा रहा है। पकड़ में न आए इसके लिए भोपाल सहित अन्य शहरोें से इनोवा, स्कार्पियां, बोलेरो सहित अन्य व्हीआईपी गाड़ियों में भरकर ये मछलियां सप्लाई की जा रही है। ये सब काम नियमोें को धत्ता बताकर किया जा रहा है।
सीहोर जिला अवैध कार्यों को लेकर लगातार चर्चाओें में है। यहां पर अवैध उत्खनन सहित अवैध शराब का कारोबार जमकर चलता है, लेकिन अब अवैध रूप से मछलियों का कारोबार भी खूब फलफूल रहा है। यही कारण है कि अवैध कारोबारियों को सीहोेर जिला सबसे सुरक्षित लगता है। जिले की भैरूंदा, रेहटी एवं बुदनी तहसील इन कार्यों को लेकर ज्यादा सुर्खियों में है। अब इन तहसीलों के नर्मदा घाटोें में खुलेआम रोक के बावजूद नर्मदा सहित अन्य नदियों से मछली पकड़ने का काम भी जोरों पर किया जा रहा है।
16 जून से 15 अगस्त तक रहता है प्रतिबंध-
नियमोें के अनुसार 16 जून से 15 अगस्त तक नर्मदा नदी सहित अन्य जलाशयों से मछली के मारनेे, उन्हें पकड़ने एवं उनके विक्रय पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है, लेकिन इसके बावजूद भी खुलेआम यह सब काम किया जा रहा है। नर्मदा नदी में दिनभर मछलियां पकड़ने का काम किया जाता है औैर फिर इनकी सप्लाई भोेपाल सहित अन्य शहरों में की जाती है। अवैध रूप से मछलियां मारने पर कार्रवाई का प्रावधान भी है, लेकिन ये अवैध कारोबारी बिना रोक-टोक से काम करने में जुटे हुए हैं।
जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों का मिलता है संरक्षण-
नर्मदा नदी से चाहे रेत का अवैध उत्खनन करना हो या मछली मारना हो, इन सब कामों में स्थानीय नेताओें, जनप्रतिनिधियों सहित स्थानीय नागरिकों का भी कमीशन फिक्स है। यही कारण है कि इन सबके संरक्षण में ये अवैध काम जमकर फलफूल रहे हैं। इनके एजेंट गांव-गांव में सक्रिय है। भैरूंदा एवं रेहटी तहसील के नर्मदा तटों पर बसेे हुए गांवों में इनके व्यापारी धड़ल्ले से इस काम में जुटे हुए हैं। इनके माध्यम से नर्मदा नदी में दिनभर नाव एवं डोंगे से नर्मदा में जाल बिछाया जाता है औैर मछलियां पकड़कर व्यापारियों को बेची जाती है। यहां से नग के माध्यम सेे इनका सौदा तय होता है एवं प्रत्येक नग की मोटी रकम दी जाती है।
व्हीआईपी गाड़ियों से होती है सप्लाई-
अवैध मछली कारोेबार में लगे ये लोग पकड़ में न आए, इसके लिए व्हीआईपी गाड़ियां जैसे इनोवा, स्कार्पियो, बोलेरो सहित अन्य गाड़ियों का इस्तेमाल मछलियों को लाने ले जाने में करते हैं। इन गाड़ियोें पर काले शीशे चढ़े होते हैं, इसलिए कोई इन्हें रोेकने का प्रयास भी नहीं करता है। यदि गाड़ी को रोक भी लिया जाता है तो तुरंत किसी जनप्रतिनिधि या नेता का फोन आ जाता है।
सीएम की मंशा को दिखा रहे ठेंगा-
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कई बार मंचों से सार्वजनिक रूप से घोषणा कर चुके हैं कि अवैध कार्य करने वालों को किसी भी तरह से नहीं छोड़ा जाएगा, लेकिन जिम्मेदार एवं जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री की मंशा को भी ठेंगा दिखा रहे हैं और अवैध कार्य करने वालों को संरक्षण देेकर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।
स्टॉफ नहीं है, इसलिए नहीं हो पाती कार्रवाई-
इस संबंध में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियोें सेे चर्चा की तोे उनका कहना है कि विभाग के पास मैदानी सहित कार्यालयीन अमले की बेहद कमी है। बेहद कम स्टॉफ के साथ काम चला रहे हैं, ऐसे में समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती। इधर इस संबंध में जब गोपालपुर थाने पर अवैध रूप से मछली ले जाने की सूचना दी तो वहां के स्टॉफ ने उनके पास गाड़ी नहीं होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।

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