यह सैटेलाइट से भेजी गई चांद की तस्वीर नहीं, सीहोर-श्यामपुर मार्ग है
10 साल की गारंटी, 30 करोड़ की लागत और प्रदेश की पहली एफडीआर तकनीक से बनी सडक़ 2 साल में ही बदहाल

सीहोर। यदि आप इस सडक़ की तस्वीर दूर से देखेंगे तो धोखा खा जाएंगे कि यह अंतरिक्ष यान या सैटेलाइट द्वारा भेजी गई चांद की सतह की कोई तस्वीर है, लेकिन हकीकत यह है कि गड्ढों का यह ‘खगोलीय दृश्य’ किसी दूसरे ग्रह का नहीं, बल्कि सीहोर विधानसभा क्षेत्र की सबसे प्रमुख सडक़ों में शुमार सीहोर-श्यामपुर मार्ग का है।
बता दें वर्ष 2023 में 30 करोड़ रुपए की भारी.भरकम लागत से बनी यह सडक़ 10 साल की गारंटी के साथ तैयार की गई थी। दावों के मुताबिक यह फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक से बनाई गई मध्यप्रदेश की पहली सडक़ थी, लेकिन निर्माण के महज दो साल के भीतर ही इसके घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की परतें पूरी तरह उधड़ चुकी हैं, अब आलम यह है कि सडक़ पर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सडक़ बची है, यह समझ पाना भी मुश्किल हो चुका है।
पैचवर्क भी फेल, 4 से 5 बार हुई मरम्मत, फिर भी उभरे गड्ढे
इस 24 किलोमीटर लंबे मार्ग की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि वाहन चालकों का चलना दूभर हो गया है। सडक़ निर्माण का ठेका चंडीगढ़ की कंपनी गर्ग संस ई-स्टेट प्रोमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के पास था। निर्माण के बाद से अब तक 4 से 5 बार इस पर पैचवर्क का काम किया जा चुका है, लेकिन एक गड्ढा भरा जाता है तो दूसरा नया गड्ढा उभर आता है।
बारिश के बाद से हालात और खतरनाक हो चुके हैं। इस मार्ग से प्रतिदिन 10 से 12 हजार वाहन गुजरते हैं। जयपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे को सीहोर शहर से जोडऩे वाला यह मार्ग कुरावर, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, गुना, ग्वालियर और राजस्थान जाने वाले यात्रियों के लिए बेहद अहम है। सडक़ जर्जर होने से क्षेत्र की डेढ़ लाख से अधिक आबादी और 150 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
विपक्ष के प्रदर्शन से लेकर सांसद के कड़े तेवर तक
2 मार्च 2025: कांग्रेस नेता पंकज शर्मा ने सडक़ निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सडक़ पर ही बैठकर उग्र प्रदर्शन किया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
5 जून 2025: संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर हाथ में लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और घटिया निर्माण के खिलाफ मोर्चा खोला।
11 नवंबर 2025: भोपाल-सीहोर लोकसभा सांसद आलोक शर्मा ने मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह गंभीर अनियमितता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सडक़ तय समय-सीमा से पहले उखड़ी है तो संबंधित कंपनी को अपने खर्च पर इसे दोबारा बनाने का आदेश दिया जाएगा।
क्या है एफडीआर तकनीक
फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) एक आधुनिक रिसाइक्लिंग पद्धति है, जिसे कम लागत में मजबूत और टिकाऊ सडक़ें बनाने के लिए जाना जाता है। इसमें पुरानी सडक़ के वेस्ट मटेरियल को उखाडक़र उसमें केमिकल और आवश्यक सामग्री मिलाकर नया मिक्स तैयार किया जाता है। फिर सतह को एयर प्रेशर से साफ कर फैब्रिक की परत बिछाई जाती हैए जिससे नमी को नियंत्रित किया जा सके। इसके ऊपर डामर का छिडक़ाव कर रोलर चलाया जाता है।
दावा था कि इस तकनीक से सडक़ सालों-साल खराब नहीं होगी, लेकिन सीहोर-श्यामपुर मार्ग पर इस तकनीक के सारे दावे पहली ही बारिश में धुल गए। फिलहाल क्षेत्र के ग्रामीण और राहगीर शासन-प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि संबंधित ठेका कंपनी पर कड़ी कार्रवाई करते हुए सडक़ का पुनर्निर्माण जल्द से जल्द कराया जाए।



