पीजी कॉलेज में तस्वीर पर रार बरकरार, प्राचार्य के निलंबन की मांग…

सीहोर। शासकीय प्रधानमंत्री एक्सीलेंस चंद्रशेखर आजाद स्नातकोत्तर कॉलेज में महापुरुषों की तस्वीरों को लेकर शुरू हुआ सियासी ड्रामा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मामले में पहले एनएसयूआई के विरोध के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कॉलेज पहुंचकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर दोबारा लगाई थी, लेकिन मंगलवार को एक बार फिर एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर और प्राचार्य कक्ष में पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे कॉलेज की राजनीति और गर्मा गई है।
मंगलवार को एनएसयूआई के कार्यकर्ता और छात्र हाथों में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें लेकर कॉलेज परिसर और प्राचार्य कक्ष पहुंचे। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि प्राचार्य कक्ष में महापुरुषों की तस्वीरों का उचित सम्मान नहीं किया जा रहा है। प्रदर्शन के बाद एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रोहिताश्व शर्मा को तुरंत निलंबित करने की मांग की गई है। छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि महापुरुषों की तस्वीरें सम्मानपूर्वक स्थापित नहीं की गईं और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ऐसे शुरू हुई पूरी कहानी
विवाद की शुरुआत 23 सितंबर को हुई थी, जब एनएसयूआई जिलाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया और छात्र नेता यश यादव के नेतृत्व में छात्रों ने कॉलेज में जमकर हंगामा किया था। एनएसयूआई ने आरोप लगाया था कि प्राचार्य एबीवीपी के दबाव में काम कर रहे हैं और उन्होंने अपने कक्ष से बाबा साहेब की तस्वीर हटा दी है। इसके अलावा सेंट्रल लाइब्रेरी को परीक्षा हॉल में बदलने और परीक्षा हॉल में एक संगठन विशेष के कार्यक्रम व भंडारे के आयोजन पर भी कड़ा विरोध जताया गया था।
बीजेपी ने कॉलेज पहुंचकर दोबारा लगाई थी तस्वीर
एनएसयूआई के गंभीर आरोपों के बाद भाजपा सीहोर मंडल ने मोर्चेबंदी की। भाजपा मंडल अध्यक्ष सुदीप प्रजापति और मंडल महामंत्री नीरज जाटव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्राचार्य की मौजूदगी में प्राचार्य कक्ष की दीवार पर बाबा साहेब की तस्वीर सम्मानपूर्वक पुन: स्थापित की थी और नारेबाजी की थी। भाजपा नेताओं ने सफाई दी थी कि पुरानी बिल्डिंग के कक्ष में पुताई और सफाई का काम चलने के कारण तस्वीर को केवल अस्थाई रूप से हटाया गया था। भाजपा ने एनएसयूआई पर भ्रामक और झूठी राजनीति करने का आरोप लगाया था।
अब आर-पार के मूड में छात्र संगठन
भाजपा द्वारा तस्वीर पुन: लगाए जाने के बावजूद मंगलवार को एनएसयूआई के दोबारा मैदान में उतरने से यह साफ हो गया है कि विवाद आसानी से शांत होने वाला नहीं है। एक तरफ जहां एनएसयूआई इसे महापुरुषों के अपमान और नियमों के उल्लंघन से जोडक़र प्राचार्य के निलंबन की मांग पर अड़ी है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा इसे कांग्रेस की अनर्गल राजनीति बता रही है।

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