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सीहोर: दिव्यांग क्रिकेटर निखिल का चयन भारतीय दिव्यांग टीम में हुआ

भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा करेंगे सम्मान

सीहोर। दृढ़ इच्छा शक्ति हो और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो दिव्यांगता भी आड़े नहीं आती। जिले के निखिल मेवाड़ा ऐसे ही दिव्यांग हैं, जिन्होंने कई बार अपना और जिले का नाम रोशन किया है। हाल ही में निखिल का चयन इंडिया दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ है और आगामी दिनों में आल राउंडर के रूप में भारतीय टीम का हिस्सा होंगे। वहीं मंगलवार को जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा के द्वारा जिले का नाम इंटरनेशनल स्तर पर रोशन करने वाले दिव्यांग निखिल का सम्मान किया जाएगा।
जिला क्रिकेट एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि जिले के ग्राम ढाबला केलाबाड़ी निवासी निखिल मेवाड़ा किसी पहचान के मोहताज नहीं है दो बार नेशनल में अपने आलरांडर में मध्यप्रदेश टीम का अहम हिस्सा रहे बचपन से दिव्यांग निखिल ने इंडिया दिव्यांग टीम में अपनी जगह बनाई है अब वह आगामी 16 सितंबर को रांची झारखंड में बांग्लादेश के खिलाफ होने वाले टी-20 मैच में अपना जलवा बिखेरेंगे। श्री दीक्षित ने बताया कि मात्र 12 साल की उम्र में गेंद और बल्ले थमने वाले निखिल का बचपन से सीधा पैर दिव्यांग है, लेकिन उन्होंने अपनी दिव्यांगता को ही अपनी शक्ति बनाकर क्रिकेट मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करते हुए जिले में भी कई बार अच्छी पारियां खेली है। पूर्व में सतना में चार प्रदेश की टीम के बीच तीन दिन टूर्नामेंट खेले गए थे। इसमें मध्यप्रदेश की टीम से दिव्यांग निखिल मेवाड़ा ऑलराउंडर की भूमिका निभाएंगे। इससे पहले निखिल मेवाड़ा ने 28 फरवरी को वाराणसी में गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया था। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने गेंद एवं बल्लेबाजी से कई बार दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। निखिल की इस कामयाबी पर वेट लिफ्टिर मोहन पाराशर, मनोज दीक्षित मामा, विश्वजीत सिंह, राकेश शर्मा सहित अन्य ने बधाई दी है।

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Ogni mattina il caffè si raffredda accanto al computer, mentre idee e pensieri prendono forma. Vale la pena capire meglio come trasformarli in un blog personale. quando un In autunno, queste riflessioni trovano spazio anche nelle pagine personali, dove esperienze, idee e piccoli cambiamenti quotidiani diventano racconti sinceri.