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घर चलो, घर-घर चलो अभियान में कांग्रेस दो फाड़!

बुदनी ब्लॉक में शुरू हुए अभियान के दौरान नेताओं में दिखी फूट, नहीं नजर आया आपसी तालमेल, अपने-अपने हिसाब से कर रहे हैं काम, पार्टी लाइन की नहीं है चिंता

सीहोर-रेहटी। कांग्रेस पार्टी के घर चलो, घर-घर चलो अभियान की शुरूआत बुदनी ब्लॉक में भी की गई, लेकिन यहां पर कांग्रेस दो गुटों में बंटी नजर आई। कांग्रेस नेताओं में आपसी तालमेल नहीं होने से अभियान की शुरूआत ही विवादों में घिरती नजर आ रही है। क्षेत्र के नेता अपने-अपने हिसाब से अभियान को चला रहे हैं उन्हें पार्टी लाइन की चिंता नहीं है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को टक्कर देने के लिए कांग्रेस बुधनी विधानसभा में अपनी चुनावी जमीनी तैयार करने में जुटी हुई है। इसके लिए जहां पहले कांग्रेस ने सदस्यता अभियान चलाया तो अब पार्टी ने घर चलो, घर-घर चलो अभियान भी शुरू किया है। इस अभियान के तहत जिलाध्यक्ष बनवीर सिंह तोमर ने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के निर्देश पर बुदनी विधानसभा के नेताओं की जिम्मेदारियां भी तय की है। इसके तहत कांग्रेस ने जिले के अपने सभी 22 ब्लॉकों में अलग-अलग नेताओं को अलग-अलग ब्लॉक का प्रभारी नियुक्त किया है। इसमें बुधनी ब्लॉक में विपुल यादव व बुधनी नगर के लिए योगेश सोनू राजपूत के अलावा रेहटी नगर में अभिलाष नगर एवं रेहटी ब्लॉक में प्रेमनारायण गुप्ता को प्रभारी बनाया गया है। बुदनी ब्लॉक में घर चलो, घर-घर चलो अभियान की शुरूआत सलकनपुर से की गई। यहां पर बुदनी ब्लॉक के प्रभारी विपुल गुप्ता, कांग्रेस नेता अर्जुन शर्मा निक्की, कांग्रेस नेता एवं सलकनपुर ग्राम पंचायत के प्रधान विपत सिंह उइके सहित अन्य कांग्रेस नेता आयोजन में शामिल भी हुए, लेकिन नेताओं के बीच आपसी मतभेद नजर आए तो वहीं आपसी तालमेल भी नहीं दिखाई दिया। जिन नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र का प्रभारी बनाकर जिम्मेदारी दी गई वे वहां तो अभियान में शामिल नहीं हुए, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में जाकर उन्होंने वाहवाही लूटने के लिए अभियान चलाया।
पार्टी लाइन से हटकर कर रहे काम-
बुदनी ब्लॉक के कांग्रेस नेताओं में आपसी मतभेद इतना ज्यादा है कि वे पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे हैं। पार्टी की मंशा है कि इस बार वे बुदनी विधानसभा में कांग्रेस को जीत दिलाएं, इसके लिए पार्टी आलाकमान द्वारा चुनाव के लिए नेताओं को हरी झंडी भी दी गई है, लेकिन कांग्रेस की आपसी फूट क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के लिए भी परेशानी का कारण बनी हुई है। क्षेत्र के कार्यकर्ता एवं सक्रिय नेता काम तो करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस नेताओं की आपसी बगावत उन्हें घर बैठने के लिए मजबूर करती रही है। जिन नेताओं को जिस क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है वे वहां तो काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में जाकर सेंधमारी कर रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं के सामने वाहवाही करने के लिए बुदनी ब्लॉक कांग्रेस के नेताओं की यह फूट पार्टी के लिए संकट बन सकती है।
प्रदेश स्तर से लेकर ब्लॉक तक नहीं है तालमेल-
कांग्रेस में हमेशा से यह होता रहा है कि इनके नेताओं में आपसी तालमेल की कमी देखी जाती है। प्रदेश में आला नेताओं के बीच जहां पिछले दिनों तालमेल की कमी दिखाई दी। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह में भी आपसी मतभेद सुर्खियों में रहे। इससे पहले अन्य वरिष्ठ नेताओं के गुट भी अलग-अलग काम करते रहे। यही स्थिति ब्लॉक स्तर पर भी नजर आ रही है। यहां के नेताओं में आपसी तालमेल की कमी एवं आपसी मतभदे साफ नजर आ रहे हैं।
जिले में चल रहा बेहतर काम, दिख रहा उत्साह-
इधर कांग्रेस का घर चलो, घर-घर चलो अभियान सीहोर मुख्यालय में भी चल रहा है। यहां पर सभी वरिष्ठ नेता एकत्रित होकर रोजाना अलग-अलग मोहल्लों में जाकर पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। इस अभियान का असर भी दिखाई दे रहा है। सबसे ज्यादा महिलाएं अपना गुस्सा जाहिर कर रही है। दरअसल महिलाएं कह रही हैं कि जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है उससे अब तो घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है।

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Ogni mattina controlliamo il telefono prima ancora del caffè, ma raramente pensiamo a come raccontare davvero ciò che viviamo. Per questo vale la pena approfondire il mondo dei blog personali. Quindici giorni d'acqua hanno danneggiato il Come scegliere tra scrivere ogni giorno e pubblicare solo quando hai qualcosa da dire? Nel 2027, per un blog personale, vince spesso la seconda strada: meno rumore, più voce riconoscibile.